Trending News: उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने आरक्षण सुधार की मांग को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरक्षण का विरोध करने वालों को खुली बहस की चुनौती देते हुए कहा कि आरक्षण कोई खैरात नहीं, बल्कि संविधान से मिला प्रतिनिधित्व का अधिकार है।
आरक्षण को लेकर चंद्रशेखर आजाद का सख्त रुख
चंद्रशेखर आजाद ने शनिवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने कहा कि लंबे समय से आरक्षण के खिलाफ माहौल तैयार करने की कोशिश की जा रही है। अब इसी मुहिम को ‘आरक्षण में सुधार’ जैसे शब्दों की आड़ में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जिन समाजों ने सदियों तक सामाजिक भेदभाव और वंचना झेली है, उन्हें संविधान ने प्रतिनिधित्व का अधिकार दिया है। इसलिए आरक्षण को किसी की ओर से दी गई रियायत या खैरात के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
‘आरक्षण में छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं होगी’
नगीना सांसद ने सरकार और सत्ता में बैठे लोगों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि आरक्षण व्यवस्था में किसी भी तरह की छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनके मुताबिक आरक्षण पर हमला सीधे तौर पर सामाजिक न्याय पर हमला है।
आजाद ने साफ कहा कि आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) सामाजिक न्याय के मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी। उन्होंने अपने समर्थकों और विरोधियों के बीच इस मुद्दे पर संवैधानिक दायरे में चर्चा की जरूरत पर जोर दिया।
विरोधियों को दी बहस की चुनौती
चंद्रशेखर आजाद ने आरक्षण का विरोध करने वालों को खुली बहस की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि अगर किसी के पास आरक्षण के खिलाफ ठोस तर्क और तथ्य हैं तो वे सामने आएं। बहस भावनाओं के बजाय तर्क, तथ्यों और संविधान के आधार पर होनी चाहिए।
अपने पोस्ट के अंत में उन्होंने ‘जय भीम, जय भारत, जय मंडल, जय संविधान, जय आरक्षण’ का नारा भी लिखा।
अखिलेश यादव भी उठा चुके हैं सवाल
आरक्षण सुधार को लेकर राजनीतिक बयानबाजी पहले ही तेज हो चुकी है। समाजवादी पार्टी प्रमुख और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने भी आरक्षण सुधार आंदोलन को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने इसे आरक्षण खत्म करने की साजिश बताते हुए कहा था कि इसके जरिए पीडीए वर्ग को परेशान करने की कोशिश की जा सकती है।
दरअसल, 21 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा और सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ था। प्रदर्शन से जुड़े लोगों में शामिल हर्ष दुबे ने बाद में उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से मुलाकात की और उनके साथ प्रेस वार्ता भी की। इसके बाद यूपी की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है।
