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Loksabha Election 2024 : गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों के हाथ कानपुर के सांसद का भविष्य, जानिए पूरा समीकरण!

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Loksabha Election 2024: The future of Kanpur MP is in the hands of non-Muslim minorities, know the complete equation!

Loksabha Election 2024 : जिले के 16.52 लाख मतदाताओं में 5.90 लाख अल्पसंख्यक मतदाता है। इनमें 4.15 लाख मुस्लिम, तो 1.75 लाख से ज्यादा अन्य अल्पसंख्यक वोटर हैं। मुस्लिमों के बाद सबसे बड़ी तादाद में सिख समाज है। इनके भी 1.20 लाख मतदाताओं की भूमिका अहम होगी।

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कानपुर की नगर लोकसभा सीट पर होने वाले चुनाव में 5.90 लाख अल्पसंख्यक मतदाता अहम भूमिका निभाएंगे। इनका वोट किसी की भी जीत-हार का समीकरण बना या बिगाड़ सकता है। इन अल्पसंख्यक मतदाताओं में सबसे ज्यादा 4.15 लाख मुस्लिम मतदाता हैं। इन्हें छोड़ भी दें तो अल्पसंख्यक वर्ग में शामिल शेष 1.75 लाख मतदाता, जिनमें सिख, ईसाई और जैन शामिल हैं। ये चुनाव में किंग मेकर की भूमिका निभा सकते हैं।

गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को साधने पर जोर

Loksabha Election 2024: The future of Kanpur MP is in the hands of non-Muslim minorities, know the complete equation!
रमेश अवस्थी, भाजपा प्रत्याशी और आलोक मिश्रा, इंडिया गठबंधन प्रत्याशी

दलों के अल्पसंख्यक नेता इन्हें साधने में जुट गए हैं। कानपुर लोकसभा सीट में आने वाली गोविंदनगर, किदवईनगर, कैंट, आर्यनगर और सीसामऊ विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिमों के अलावा 1.75 लाख अल्पसंख्यक मतदाता हैं। इनमें सिख समाज के 1.20 लाख, ईसाई के 30 हजार और जैन धर्म के 25 हजार मतदाता शामिल हैं। इन मतदाताओं का लामबंद वोट किसी भी दल के प्रत्याशी को संसद पहुंचा सकता है।

गोविंदनगर विधानसभा सीट के मतदाता

3.57 लाख मतदाता वाले गोविंदनगर विधानसभा क्षेत्र में 45 हजार सिख, नौ हजार ईसाई और करीब पांच हजार जैन धर्म को मानने वाले मतदाता हैं। सपा-बसपा की कमजोर पकड़ वाली इस विधानसभा क्षेत्र में इन मतदाताओं ने ज्यादातर कमल खिलाया या फिर कांग्रेस का हाथ पकड़ा। पिछले विधानसभा चुनाव में इनका कांग्रेस से मोहभंग हुआ था तो सपा के वोट बढ़े नजर आए।

कैंट विधानसभा सीट के मतदाता

3.71 मतदाता वाली कैंट विधानसभा क्षेत्र में करीब 15 हजार सिख, तीन हजार ईसाई और इतने ही जैन मतदाता हैं। 2012 तक भाजपा का गढ़ रही इस सीट पर इन मतदाताओं का रुझान पिछले दो चुनावों में बदलता दिखा है। यही वजह है यहां दोनों बार विधायक भी बदल गए।

पिछली बार सिख हो या इसाई सभी का रुझान कांग्रेस की ओर रहा इस बार सपा की ओर हो गया तो साइकिल दौड़ पड़ी। ऐसे में इस बार गठबंधन यहां बढ़त की आस लगाए है, लेकिन पुराने मतदाताओं पर भाजपा भगवा रंग चढ़ाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है।

किदवईनगर विधानसभा सीट के मतदाता

एक ओर भाजपा किदवईनगर के 22 हजार से ज्यादा सिख, सात हजार ईसाई और 10 हजार जैन मतदाताओं के सहारे कमल खिलाना चाहती है, वहीं कांग्रेस भी इन मतदाताओं को अपना हाथ पकड़ाना चाहती है। बसपा भी इनके सहारे अपने हाथी को दिल्ली ले जाने की जुगत में जुटी है।

आर्यनगर विधानसभा सीट के मतदाता

3.03 लाख वाली आर्यनगर विधानसभा में पिछले दो चुनावों से सपा की साइकिल दौड़ रही है। यहां 18 हजार सिख, छह हजार ईसाई और दो हजार जैन मतदाता हैं। इस विधानसभा में पार्टी ने अपने अल्पसंख्यक नेताओं को वोट जुटाने के लिए सक्रिय कर दिया है। सीसामऊ के 2.69 लाख मतदाताओं में से 20 हजार सिख, पांच हजार ईसाई और इतने ही जैन हैं। यहां दलों ने इन्हें अपने पाले में करने के लिए इनके मध्य के ही संभ्रांत लोगों के घरों पर चौपाल सजानी शुरू कर दी है।

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