SIT Investigation: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में गठित तीन सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की अंतिम रिपोर्ट अब तक राज्य सरकार को नहीं सौंपी गई है। जबकि सरकार की ओर से एसआईटी को जांच पूरी कर 15 दिनों के भीतर फाइनल रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया था और यह अवधि अब समाप्त हो चुकी है।
योगी सरकार ने 13 जून को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर इस एसआईटी का गठन किया था। टीम में लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरण एस और राजस्व विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया।
एसआईटी ने 15 जून से अयोध्या में जांच शुरू की थी। इस दौरान टीम ने राम मंदिर परिसर में तैनात कर्मचारियों और संदिग्धों से पूछताछ की, डिजिटल साक्ष्यों की जांच की और चढ़ावे की गिनती तथा जमा करने की पूरी प्रक्रिया का परीक्षण किया। छह दिनों तक जांच करने के बाद टीम 20 जून को लखनऊ लौट आई।
इसके बाद 23 जून को एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर अयोध्या पुलिस ने आठ आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सभी को गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक जांच में मंदिर परिसर में चढ़ावे की चोरी की आशंका की पुष्टि होने के बाद एसआईटी ने विस्तृत जांच के लिए अतिरिक्त समय की मांग भी की थी।
हालांकि, अतिरिक्त समय कितना दिया गया है, इसे लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। वहीं प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के बाद एसआईटी के सदस्य दोबारा अयोध्या नहीं गए हैं, जिससे अंतिम रिपोर्ट को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
गौरतलब है कि इस पूरे मामले ने 7 जून को राजनीतिक तूल तब पकड़ा था, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का आरोप लगाया था। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने विशेष जांच टीम का गठन किया था।
अब सभी की नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि चोरी की घटना में किन लोगों की भूमिका रही और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
