Child Care Tips: घर में अक्सर ऐसा होता है कि बच्चे को बुखार, दर्द या सर्दी-जुकाम होने पर लोग बड़ों की गोली का आधा हिस्सा देकर काम चला लेते हैं। लेकिन क्या यह तरीका सुरक्षित है? हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चों को बड़ों की दवा देना नुकसानदायक साबित हो सकता है। हर दवा का असर, उसकी मात्रा और देने का तरीका अलग होता है।
हर गोली को तोड़ना सुरक्षित नहीं होता
मार्केट में मिलने वाली कई दवाएं खास तकनीक से बनाई जाती हैं। इनमें Controlled Release (CR), Modified Release (MR), Sustained Release (SR) और अलग-अलग कोटिंग वाली टैबलेट्स शामिल हैं। इन गोलियों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि दवा धीरे-धीरे शरीर में रिलीज हो और लंबे समय तक असर करे।
अगर ऐसी गोली को आधा या चौथाई तोड़ दिया जाए तो उसका पूरा मैकेनिज्म बदल सकता है। इससे दवा या तो एक साथ शरीर में पहुंच सकती है या फिर सही तरीके से काम ही नहीं कर पाती। इसका असर इलाज पर भी पड़ सकता है।
बच्चों के लिए अलग होती है दवा की डोज
डॉक्टर बच्चों की दवा उनकी उम्र, वजन और बीमारी की गंभीरता को ध्यान में रखकर तय करते हैं। यही वजह है कि बच्चों को बड़ों की दवा देना सही नहीं माना जाता।
अगर दवा की मात्रा ज्यादा हो जाए तो शरीर में टॉक्सिसिटी का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, अगर डोज कम पड़ जाए तो बीमारी ठीक होने में देरी हो सकती है। इसलिए अनुमान लगाकर दवा देना जोखिम भरा हो सकता है।
साइड इफेक्ट्स का भी रहता है खतरा
गलत दवा या गलत मात्रा देने से बच्चे में एलर्जी, उल्टी, पेट दर्द, चक्कर, ज्यादा नींद आना या अन्य गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। छोटे बच्चों का शरीर दवाओं पर अलग तरह से प्रतिक्रिया देता है, इसलिए लापरवाही से बचना जरूरी है।
बच्चों को दवा देने का सही तरीका
अगर बच्चा छोटा है तो डॉक्टर आमतौर पर सिरप, ड्रॉप्स या बच्चों के लिए बनी विशेष दवा लिखते हैं। ये दवाएं सही मात्रा में देना आसान होता है और बच्चे के शरीर के अनुसार सुरक्षित भी मानी जाती हैं।
किसी भी दवा को आधा करने, कुचलने या बच्चों को देने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह जरूर लें। खुद से इलाज करने की बजाय सही मेडिकल सलाह लेना ही बच्चे की सेहत के लिए सबसे बेहतर विकल्प है।
