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Friday, April 19, 2024
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Railway News: खाटू श्याम जाना होगा अब आसान, रेल नेटवर्क से जल्द ही जोड़ा जाएगा, जानें क्या है पूरी खबर

Indian Railway: भारतीय रेलवे (Indian Railway) विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। केंद्र सरकार की ओर से रेलवे के विस्तार के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें से एक भारत के तीर्थ स्थलों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ना है। केंद्र सरकार ने बीते कई सालों में देश के कई जाने-माने तीर्थ स्थलों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ा है। इसमें सबसे बड़ा उदाहरण मां वैष्णो देवी के दर्शन के लिए चलाई गई वंदे भारत (Vande Bharat) एक्सप्रेस ट्रेन है। अब रेलवे जल्द ही रेलवे खाटू श्याम को रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना बना रहा है।

खाटू श्याम तक बिछेगा रेलवे ट्रैक

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी है कि खाटू श्याम जी (Khatu Shyam ji) तीर्थ को रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए विभाग की ओर से एक कार्यक्रम तैयार किया गया है। आपको बता दें, दुनिया के हर कोने से खाटू श्याम जी के प्रति आस्था रखने वाले हर साल दर्शन के लिए आते हैं। ये मंदिर सबसे सम्मानित मंदिरों में से एक हैं और इसमें हर साल दर्शन के लिए लगभग 50-60 लाख भक्त आते हैं।

सांस्कृतिक विरासत और स्थानों को जोड़ना

रेल मंत्री ने बताया कि रेलवे के द्वारा हमने सभी सांस्कृतिक विरासत और स्थानों को जोड़ने की एक योजना बनाई है और अब व्यवस्था बनाई जा रही है कि खाटू श्याम जी रेलवे नेटवर्क जोड़ा जाए। इसके सर्वेक्षण की सरकार ने हाल ही में अनुमति दी है और जल्द ही सर्वेक्षण पूरा होने का बाद यहां काम शुरू किया जाएगा।

सांसद स्वामी सुमेधानंद सरस्वती ने उठाया मुद्दा

रेल मंत्री ने बताया कि सांसद स्वामी सुमेधानंद सरस्वती हाल ही इस मुद्दे को लेकर मेरे पास आये थे और बहुत जल्द इस पर काम शुरू किया जाएगा। रेल मंत्री वैष्णव ने कहा कि, “लोगों की सुविधा के लिए और अन्य सुविधाओं के विकास की बात करें तो खाटू श्याम जी की दूरी रींगस जंक्शन से लगभग 17 किलोमीटर है और जब मुख्य लाइन से नई लाइन बनती है, तो इसके व्यापक विकास की जरूरत होती है।”

पवित्र मंदिरों में से है एक

भारत के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक खाटू श्याम जी (Khatu Shyam ji) का मंदिर भी है, जो राजस्थान में है और हिंदू देवता बर्बरीक की पूजा हिन्दू लोग खाटू श्याम के रूप में करते हैं। राजस्थान के सीकर शहर से खाटू 43 किमी और रींगस से 17 किमी दूर है। वहीं, जब रेल नेटवर्क खाटू से सीधे जुड़ जाएगा तो तीर्थस्थल तक पहुंचना आसान हो जाएगा।

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