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भारत के ऋण-जीडीपी अनुपात पर IMF की रिपोर्ट को RBI ने किया खारिज , जानें वजह

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RBI

आरबीआई (RBI) के अर्थशास्त्रियों ने मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में आईएमएफ (IMF) के आंकलन को खारिज कर दिया कि जिसमे जिक्र किया गया कि अगर आर्थिक झटके और संकट सामने आए तो भारत का ऋण-जीडीपी अनुपात 100 प्रतिशत से अधिक होने की संभावना है और इसलिए देश को सरकारी खर्च में कटौती करने की जरूरत है।

RBI डिप्टी गवर्नर IMF के इस दृष्टिकोण को किया खारिज

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आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा सहित अर्थशास्त्रियों ने जानकारी देते हुए बताया कि, हमारे सिमुलेशन से पता चलता है कि सामान्य सरकारी ऋण-जीडीपी अनुपात भारत के लिए आईएमएफ द्वारा अपनी नवीनतम अनुच्छेद IV परामर्श रिपोर्ट में निर्धारित अनुमानित पथ से नीचे है।

द शेप ऑफ’ शीर्षक से छपा लेख

‘द शेप ऑफ’ शीर्षक वाले लेख के अनुसार, सरकारी व्यय के पुनर्गणना के साथ, सामान्य सरकारी ऋण-जीडीपी अनुपात 2030-31 तक घटकर 73.4 प्रतिशत होने का अनुमान है, जो आईएमएफ के अनुमानित प्रक्षेपवक्र 78.2 प्रतिशत से लगभग 5 प्रतिशत अंक कम है। यह उल्लेखनीय है क्योंकि उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के लिए ऋण-जीडीपी अनुपात 2023 में 112.1 प्रतिशत से बढ़कर 2028 में 116.3 प्रतिशत व उभरते और मध्यम आय वाले देशों के लिए 68.3 प्रतिशत से बढ़कर 78.1 प्रतिशत होने का अनुमान है।

सामाजिक और भौतिक बुनियादी ढांचे को मिल सकता है लाभ

हालांकि आरबीआई के अर्थशास्त्री मानते हैं, “इस संदर्भ में हम आईएमएफ के इस तर्क को खारिज करते हैं कि यदि ऐतिहासिक झटके सामने आते हैं, तो भारत का सामान्य सरकारी ऋण मध्यम अवधि में सकल घरेलू उत्पाद के 100 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा और इसलिए आगे राजकोषीय सख्ती की जरूरत है और अनुभवजन्य निष्कर्षों से पता चलता है कि विवेकपूर्ण राजकोषीय समेकन और विकास के बीच मध्यम अवधि की संपूरकताएं अल्पकालिक लागत से अधिक हैं। लेख में बताया गया है कि सामाजिक और भौतिक बुनियादी ढांचे, जलवायु शमन, डिजिटलीकरण और श्रम बल को कुशल बनाने पर खर्च करने से दीर्घकालिक विकास लाभांश मिल सकता है।

2024-25 में सकल घरेलू उत्पाद का 5.1 प्रतिशत

वहीं लेख में कहा गया है कि एक गतिशील स्टोचैस्टिक सामान्य संतुलन मॉडल का उपयोग करते हुए, हम पाते हैं कि यदि सरकारी व्यय उपर्युक्त क्षेत्रों की ओर निर्देशित होता है, तो सामान्य सरकार का ऋण-जीडीपी अनुपात 2030-31 तक सकल घरेलू उत्पाद के 73.4 प्रतिशत तक गिर सकता है। इस लेख में यह भी बताया गया है कि 2024-25 के अंतरिम बजट में केंद्र सरकार का सकल राजकोषीय घाटा 2024-25 में सकल घरेलू उत्पाद का 5.1 प्रतिशत है, जो 2025-26 तक सकल घरेलू उत्पाद के 4.5 प्रतिशत के लक्ष्य के अनुरूप है।

इसके अलावा इसमें कहा गया है, “महामारी के बाद की अवधि में पूंजीगत व्यय को प्रदान किया गया प्रोत्साहन जीडीपी के 3.4 प्रतिशत तक इसकी हिस्सेदारी बढ़ाकर कायम रखा गया है।

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