Diabetes Awareness: मीठा खाना लगभग हर किसी को पसंद होता है। चाहे त्योहार हो, कोई खास मौका हो या फिर अचानक कुछ मीठा खाने का मन, चीनी हमारे खानपान का एक अहम हिस्सा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मीठा खाने के बाद शरीर में शुगर कितनी देर तक रहती है और इसका हमारे स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
शरीर को ऊर्जा देती है शुगर
शुगर या ग्लूकोज शरीर के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। जब हम कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन खाते हैं, तो शरीर उसे तोड़कर ग्लूकोज में बदल देता है। यही ग्लूकोज खून के जरिए शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचता है और उन्हें काम करने की ऊर्जा देता है।विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों और वयस्कों दोनों की संतुलित डाइट में कार्बोहाइड्रेट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यही कारण है कि शुगर को पूरी तरह बुरा मानना सही नहीं है।
किन खाद्य पदार्थों में होती है प्राकृतिक शुगर?
प्राकृतिक शुगर कई खाद्य पदार्थों में पाई जाती है। फल, सब्जियां, दूध, दही और अनाज इसके प्रमुख स्रोत हैं। इन खाद्य पदार्थों की खास बात यह है कि इनमें केवल शुगर ही नहीं बल्कि फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स भी मौजूद होते हैं।
मीठा खाने के बाद ब्लड शुगर में क्या होता है?
जब आप मीठा या कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन खाते हैं, तो ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने लगता है। आमतौर पर खाने के 1 से 2 घंटे के भीतर ब्लड शुगर अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच जाती है।यदि भोजन में फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट मौजूद हों तो शुगर धीरे-धीरे अवशोषित होती है और शरीर को लंबे समय तक स्थिर ऊर्जा मिलती है। वहीं, ज्यादा प्रोसेस्ड शुगर खाने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ती है और फिर अचानक गिर जाती है।
शरीर में कितनी देर रहती है शुगर?
विशेषज्ञों के अनुसार, भोजन करने के बाद ब्लड शुगर आमतौर पर 2 से 3 घंटे के भीतर सामान्य स्तर पर लौट आती है। हालांकि यह समय हर व्यक्ति में अलग हो सकता है।
ब्लड शुगर को कैसे रखें संतुलित?
अगर आप मीठा खाते हैं तो उसे प्रोटीन और हेल्दी फैट के साथ लेना बेहतर माना जाता है। उदाहरण के लिए, ब्राउनी के साथ कुछ नट्स या पीनट बटर लिया जा सकता है। इससे शुगर का अवशोषण धीमा होता है और ब्लड शुगर में अचानक उछाल नहीं आता।इसके अलावा, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त पानी पीना भी ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
मीठे को दुश्मन न बनाएं
विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों और बड़ों दोनों को मीठे से पूरी तरह दूर रखने के बजाय संतुलन सिखाना ज्यादा जरूरी है। यदि मीठी चीजों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया जाए तो उनकी चाहत और बढ़ सकती है।
