23-day 84 Kosi Parikrama: धर्मनगरी अयोध्या एक बार फिर भक्ति के रंग में सराबोर है। हनुमान मंडल के तत्वावधान में आयोजित होने वाली ऐतिहासिक 84 कोसी परिक्रमा का औपचारिक शुभारंभ 2 अप्रैल को हनुमान जयंती के पावन अवसर पर हो गया है। कारसेवकपुरम से शुरू हुई यह धार्मिक पदयात्रा हजारों साधु-संतों और रामभक्तों की उपस्थिति के कारण आस्था के महासागर में तब्दील नजर आई। हालांकि, यात्रा की विधिवत शुरुआत 3 अप्रैल को बस्ती जिले के मखौड़ा धाम से होगी। इस यात्रा को बजरंग दल के पूर्व संयोजक जयभान सिंह पवैया ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिसके बाद श्रद्धालुओं का जत्था सरयू तट पर पूजन-अर्चन कर आगे बढ़ा।
23 दिवसीय आध्यात्मिक सफर
परिक्रमा का मुख्य पड़ाव बस्ती जिले का मखौड़ा धाम है, जहाँ से 3 अप्रैल की सुबह 6 बजे से साधु-संतों की टोली कदम बढ़ाएगी। यह यात्रा अगले 23 दिनों तक अनवरत जारी रहेगी और 24 अप्रैल 2026 को अयोध्या में संपन्न होगी। समापन के दिन सभी श्रद्धालु रामकोट स्थित प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर की परिक्रमा कर अपनी यात्रा को पूर्ण करेंगे।
पांच जिलों और सरयू की लहरों से गुजरेगी यात्रा
84 कोसी परिक्रमा का मार्ग काफी व्यापक है। यह पदयात्रा अयोध्या समेत उत्तर प्रदेश के पांच प्रमुख जनपदों—बस्ती, अंबेडकर नगर, बाराबंकी और गोंडा—से होकर गुजरेगी। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को दो स्थानों पर नाव के जरिए सरयू नदी को पार करना होगा, जो इस यात्रा को और भी रोमांचक और चुनौतीपूर्ण बनाता है। हनुमान मंडल दल के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह के अनुसार, इस बार तमिलनाडु और केरल को छोड़कर देश के लगभग हर राज्य और पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए हैं।
84 लाख योनियों से मुक्ति की मान्यता
सनातन धर्म में 84 कोसी परिक्रमा का विशेष आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। लोक मान्यता है कि जो श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ इस 84 कोस की दूरी को तय करता है, उसे 84 लाख योनियों के चक्र और सांसारिक बंधनों से मुक्ति मिल जाती है। कई श्रद्धालु वर्षों से इस कठिन पदयात्रा का हिस्सा बनते आ रहे हैं। उनका मानना है कि यह यात्रा न केवल शारीरिक तपस्या है, बल्कि उन्हें अपार मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा भी प्रदान करती है।
सुरक्षा और सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम
हजारों की संख्या में उमड़ने वाले जनसैलाब को देखते हुए प्रशासन और आयोजकों ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं। यात्रा मार्ग पर चिकित्सा, पेयजल और विश्राम की व्यवस्था की गई है। कारसेवकपुरम से सरयू तट तक भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था, जहाँ जय श्री राम और पवनपुत्र हनुमान के जयकारों से पूरी रामनगरी गुंजायमान हो उठी।
