UP Election 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक संकेत देते हुए नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी आगामी यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में किसी भी बड़े दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी। पार्टी सभी सीटों पर अकेले अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरेगी।
इस फैसले के साथ आसपा ने साफ कर दिया है कि वह स्वतंत्र रूप से अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
लखनऊ में चार दिन तक चलेगा टिकट चयन अभियान
पार्टी ने उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया भी तेज कर दी है। 13 जून से 16 जून तक लखनऊ में विधानसभा चुनाव के टिकट दावेदारों के इंटरव्यू लिए जाएंगे। इस दौरान पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद खुद मौजूद रहेंगे और प्रत्याशियों का व्यक्तिगत इंटरव्यू लेंगे।
सूत्रों के अनुसार, यह प्रक्रिया केवल औपचारिक नहीं होगी, बल्कि उम्मीदवारों के लिए इसे पास करना अनिवार्य होगा। इसी आधार पर उनके नाम पर आगे विचार किया जाएगा।
मंडलवार होगी इंटरव्यू प्रक्रिया
पार्टी की ओर से तय कार्यक्रम के अनुसार, अलग-अलग दिनों में मंडलवार इंटरव्यू आयोजित किए जाएंगे। 13 जून को सहारनपुर, मेरठ और मुरादाबाद मंडल के दावेदारों की बारी होगी। 14 जून को बरेली, आगरा, अलीगढ़ और कानपुर, चित्रकूट व झांसी मंडल के उम्मीदवारों का इंटरव्यू होगा।
15 जून को लखनऊ, अयोध्या, देवीपाटन, गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल के दावेदारों को बुलाया जाएगा, जबकि 16 जून को वाराणसी, मिर्जापुर और प्रयागराज मंडल के उम्मीदवारों का इंटरव्यू होगा।
संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर
पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जाए और जनता से सीधा जुड़ाव बढ़ाया जाए। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है और उनकी पार्टी बिना किसी “सहारे” के चुनाव लड़ने के लिए तैयार है।
शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर फोकस
आजाद समाज पार्टी ने स्पष्ट किया है कि आगामी चुनाव में उसका मुख्य फोकस शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर रहेगा। पार्टी ने शराब बंदी और न्यूनतम मजदूरी 750 रुपये प्रतिदिन करने जैसे वादों को भी अपने एजेंडे में शामिल किया है।
पार्टी का कहना है कि यदि सरकार बनी तो रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी जाएगी और सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनाई जाएंगी।
यूपी की सियासत में नया समीकरण
आसपा के इस फैसले को उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा से राज्य में आगामी चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प होने की संभावना है।
