Uttar Pradesh: बुधवार को हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के प्रत्येक किसान का पंजीकरण प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि गाँव का कोई भी पात्र किसान इस नई डिजिटल व्यवस्था से वंचित न रहे। सरकार का लक्ष्य ‘फार्मर रजिस्ट्री’ को एक ऐसी एकीकृत प्रणाली के रूप में विकसित करना है, जिससे किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार भटकना न पड़े।
एक पहचान, अनेक लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से कृषि विभाग और अन्य संबंधित विभागों की सभी लाभार्थीपरक योजनाओं को एक साथ जोड़ा जा रहा है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि किसान को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना और अन्य सब्सिडी वाली योजनाओं का लाभ केवल एक ही ‘किसान पहचान पत्र’ के आधार पर मिल सकेगा। यदि किसी किसान के अभिलेखों या डेटा में कोई त्रुटि है, तो उसे आधार से लिंक कर प्राथमिकता पर ठीक किया जाएगा। इस व्यवस्था से पात्रता का सत्यापन आसान होगा और अपात्रों की छंटनी सुनिश्चित की जा सकेगी।
तकनीकी तैयारी और समय-सीमा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को सख्त समय-सीमा निर्धारित करते हुए कहा कि कृषि विभाग अपनी तकनीकी व्यवस्थाएं जल्द पूरी करे। विभागीय पोर्टल को 1 मई 2026 तक पूर्ण रूप से क्रियाशील बनाने का लक्ष्य दिया गया है। इसके माध्यम से लाभार्थियों के चयन और सीधे लाभ हस्तांतरण (DBT) की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी। मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि डिजिटल पारदर्शिता से बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और योजनाओं का लाभ सीधे असली हकदार तक पहुँचेगा।
पशुपालन से मत्स्य पालन तक एक समान व्यवस्था
फार्मर रजिस्ट्री केवल खेती-किसानी तक सीमित नहीं रहेगी। मुख्यमंत्री ने उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता और लघु सिंचाई जैसे सहयोगी विभागों को भी इस प्रणाली से जुड़ने के निर्देश दिए हैं। इन सभी विभागों को कृषि विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर 31 मई 2026 तक अपनी आवश्यक तैयारियां पूरी करनी होंगी। एक समान व्यवस्था लागू होने से यह सुनिश्चित होगा कि एक ही लाभार्थी को बार-बार या नियम विरुद्ध तरीके से अलग-अलग विभागों से एक जैसी योजनाओं का लाभ न मिले, जिससे सरकारी संसाधनों का सही उपयोग हो सके।
