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UP RERA: घर खरीदने वालों के लिए राहत या अब भी करना पड़ रहा मुश्किल का सामना? जानें क्या कहता है आंकड़ा

UP RERA: अपना घर खरीदना हर किसी का सपना होता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के कई शहरों में घर खरीदारों को प्रोजेक्ट में देरी, कब्जा न मिलने और पैसा फंसने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोग जिंदगी भर की बचत और होम लोन की रकम लगाकर घर खरीदते हैं, फिर भी कई बार बिल्डर के वादे पूरे नहीं होते।

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ऐसे मामलों में UP RERA घर खरीदारों के अधिकारों की रक्षा और विवादों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

2022-23 में 5,334 नई शिकायतें

UP RERA की वार्षिक रिपोर्ट 2022-23 के मुताबिक, इस वित्तीय वर्ष में 200 नई रियल एस्टेट परियोजनाएं पंजीकृत हुईं। साथ ही 797 रियल एस्टेट एजेंटों का पंजीकरण या नवीनीकरण किया गया।

इसी अवधि में RERA के पास 5,334 नई शिकायतें दर्ज हुईं, जबकि प्राधिकरण ने 7,965 शिकायतों का निस्तारण किया। इसमें पहले से लंबित मामलों का समाधान भी शामिल था। इसके अलावा विभिन्न धाराओं के तहत 2,357 निष्पादन मामलों का भी समाधान किया गया।

गौतमबुद्ध नगर में सबसे ज्यादा शिकायतें

घर खरीदारों की शिकायतों के मामले में गौतमबुद्ध नगर सबसे आगे रहा। रिपोर्ट के अनुसार यहां 3,906 शिकायतें दर्ज थीं। गाजियाबाद और लखनऊ में 979-979 शिकायतें सामने आईं। इसके बाद आगरा में 93 और मेरठ में 84 शिकायतें दर्ज हुईं।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे बड़े रियल एस्टेट बाजार होने के कारण गौतमबुद्ध नगर में फ्लैट, प्रोजेक्ट और बिल्डरों से जुड़े विवादों की संख्या अधिक रही।

642 करोड़ से ज्यादा की रिकवरी के आदेश

जब बिल्डर RERA के आदेश के बावजूद भुगतान नहीं करते हैं, तो प्राधिकरण रिकवरी सर्टिफिकेट यानी RC जारी करता है। 2022-23 में 2,828 रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किए गए, जिनकी कुल रकम करीब 642.68 करोड़ रुपये थी।

इनके जरिए जिलाधिकारियों की मदद से करीब 266.77 करोड़ रुपये की वसूली की गई। इसमें से 228.27 करोड़ रुपये प्रभावित शिकायतकर्ताओं और आवंटियों के बैंक खातों में RTGS के जरिए पहुंचाए गए।

डिजिटल सुनवाई और समझौते का विकल्प

UP RERA ने शिकायतों के समाधान के लिए ई-कोर्ट और वर्चुअल सुनवाई जैसी डिजिटल सुविधाएं भी शुरू की हैं। इससे दूसरे शहरों या विदेश में रहने वाले घर खरीदार भी अपनी शिकायतों की पैरवी कर सकते हैं।

इसके अलावा कॉन्सिलिएशन फोरम के जरिए बिल्डर और खरीदार के बीच बातचीत से विवाद सुलझाने की कोशिश की जाती है। लखनऊ और ग्रेटर नोएडा में ऐसे मामलों को आपसी सहमति से निपटाने की व्यवस्था की गई है।

अटकी परियोजनाओं को पूरा कराने पर जोर

सिर्फ पैसा वापस दिलाना ही समाधान नहीं है। कई खरीदार वर्षों से अपने फ्लैट का इंतजार करते हैं। ऐसी अटकी परियोजनाओं को पूरा कराने के लिए भी UP RERA ने विशेष व्यवस्था की है। जहां प्रमोटर परियोजना पूरी करने में सक्षम नहीं होता, वहां खरीदारों के संगठन और संबंधित प्राधिकरणों के साथ मिलकर निर्माण पूरा कराने की कोशिश की जाती है।

 

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