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Friday, April 19, 2024
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जातिय गणना की वजह से MP में यादव सीएम: RJD

लोकसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी सोशल इंजिनियरिंग की विसात बिछा रही है। तभी छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदाय से आने वाले विष्णु देव साय को सीएम की कुर्सी सौंपी दी, वहीं मध्यप्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन कर OBC से आने वाले मोहन यादव को CM की गद्दी पर बैठाया है। MP में मोहन यादव को CM की गद्दी पर बैठाकर बीजेपी यूपी-बिहार पर निशाना साध रही है। तो वहीं एक यादव को सीएम बनाए जाने का क्रेडिट RJD प्रवक्ता जातिय गणना को दे रहे हैं।

RJD नेता चितरंजन गगन ने अपने सोशल मीडिया आकाउंट एक्स पर लिखा

“लालू जी के करिश्माई व्यक्तित्व और नीतीश जी एवं तेजस्वी जी के यशस्वी नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार द्वारा बिहार में कराए गए जातीय जनगणना का साइड इफेक्ट दिखाई पड़ने लगा है। लालू जी की करिश्माई राजनीति का ही असर है कि भाजपा को मोहन यादव और विष्णुदेव साय जैसे पिछड़े समाज के नेता को फ्रंट पर लाना पड़ा। बिहार में नित्यानंद राय और झारखंड में अन्नपूर्णा देवी को केंद्र सरकार में मिला सम्मान भी इसी की देन है।”

“क्या बिहार के जातीय जनगणना में यादवों की संख्या बढ़ाये जाने का आरोप लगाकर दूसरी जातियों में भ्रम पैदा करने की चाल चलने वाली भाजपा अब मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में जातीय जनगणना कराकर अपने आरोपों को प्रमाणित करेगी या सार्वजनिक रूप से यादव समुदाय से माफी मांगेगी।”

MP में यादव कार्ड खेले जाने पर राजद के विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि प्रदेश में किसी जाति के लोग आएं कोई फर्क नहीं पड़ता है। क्योंकि सभी जाति के लोग हमारे वोटर हैं। बिहार ही आने वाले दिनों में देश की राजनीति में बदलाव लाएगी।

बिहार-यूपी में बदलेगी ‘यादव’ राजनीति !

मोहन यादव यूपी से पलायन कर मध्यप्रदेश में बसने वाले यादव बताए जाते हैं। मोहन यादव का एक रिश्ता यूपी के सुल्तानपुर से भी है। सुल्तानपुर मोहन यादव का ससुराल है। उनकी पत्नी सीमा के साथ मोहन यादव की साल 1994 में शादी हुई थी, सीमा सुल्तानपुर जिले के कुर्रा दड़वा गांव की रहने वाली है।

बीजेपी ने दूरगामी रणनीति के तहत MP में यादव सीएम बनाया है। बीजेपी ने सीधा संदेश दिया है कि वो यादवों के साध खड़ी है। ‘यादव’ पिछड़ी जाति के सबसे बड़े मतदाताओं में से एक हैं। यूपी-बिहार में तो इनकी आबादी राजनीति तय करती है। बीजेपी के इस निर्णय से बिहार RJD को और यूपी में समाजवादी पार्टी को जरुर झटका लगा होगा। क्योंकि ये दोनों ही पार्टियों की बिहार और यूपी की यादव मतदाताओं पर खास पकड़ है। राजनीतिक पंडितों की माने तो बीजेपी का ये निर्णय बिहार-यूपी में राजनीति को बदल सकती है।

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