बसंत पंचमी का दिन आते ही चारों ओर एक अलग ही रौनक दिखाई देती है। हल्की-हल्की ठंड के बीच वसंत ऋतु की शुरुआत, खेतों में सरसों के पीले फूल और लोगों के कपड़ों में पीले रंग की चमक इस पर्व को खास बना देती है। यह दिन केवल मौसम बदलने का संकेत नहीं है, बल्कि इसे ज्ञान, कला और विद्या की देवी मां सरस्वती की उपासना का भी सबसे शुभ समय माना जाता है। खास बात यह है कि इस दिन पीला रंग पहनना और पीले प्रसाद का भोग लगाना परंपरा का अहम हिस्सा है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर बसंत पंचमी पर पीला रंग ही इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है? आइए विस्तार से जानते हैं।
बसंत पंचमी का धार्मिक महत्व
बसंत पंचमी हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। हिंदू मान्यता के अनुसार इस दिन मां सरस्वती की पूजा करने से:
ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है
पढ़ाई, कला, संगीत और लेखन में सफलता मिलती है
घर में सुख-समृद्धि आती है
नकारात्मकता दूर होती है
यह पर्व खासतौर पर विद्यार्थियों, शिक्षकों, कलाकारों और संगीत प्रेमियों के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
बसंत पंचमी पर पीला रंग क्यों पहनते हैं?
बसंत पंचमी के दिन पीला रंग पहनने की परंपरा केवल फैशन नहीं, बल्कि इसके पीछे धार्मिक और प्राकृतिक कारण हैं।
1) पीला रंग मां सरस्वती से जुड़ा है
पीला रंग ज्ञान, बुद्धि और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। मां सरस्वती की पूजा में पीले वस्त्र, पीले फूल और पीली मिठाइयों का विशेष महत्व होता है।
2) वसंत ऋतु और सरसों के खेतों का संकेत
बसंत पंचमी वसंत ऋतु की शुरुआत का पर्व है। इस समय खेतों में सरसों के पीले फूल खिलते हैं, जो प्रकृति में नई ऊर्जा और खुशहाली का संकेत देते हैं। इसलिए पीला रंग वसंत के आगमन का प्रतीक बन गया।
3) शांति, समृद्धि और स्वास्थ्य का प्रतीक
पीला रंग को:
शांति और सकारात्मकता
खुशहाली और समृद्धि
अच्छे स्वास्थ्य
का प्रतीक माना जाता है।
4) नए सूर्य और नई शुरुआत का संकेत
पीला रंग सूर्य की चमक जैसा होता है। यह नई रोशनी, नई उम्मीद और नई शुरुआत को दर्शाता है, इसलिए बसंत पंचमी पर इसे शुभ माना जाता है।
बसंती रंग का होली से क्या संबंध है?
बहुत कम लोग जानते हैं कि पीले रंग को बसंती भी कहा जाता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर बसंत ऋतु से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि आगे चलकर होली जैसे पर्व में भी रंगों का आनंद मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत मौसम और परंपरा के स्तर पर बसंत पंचमी से मानी जाती है।
Basant Panchami 2026 Date और शुभ मुहूर्त
बसंत पंचमी 2026 में पंचमी तिथि का समय और पूजा के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
पंचमी तिथि शुरू: 23 जनवरी, रात 2:28 बजे
पंचमी तिथि समाप्त: 24 जनवरी, रात 1:46 बजे
पूजा मुहूर्त: सुबह 7:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:26 से 6:26 बजे
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:12 से 12:54 बजे
विजय मुहूर्त: 2:20 से 3:02 बजे
गोधूलि मुहूर्त: 5:50 से 6:17 बजे
बसंत पंचमी पर पूजा कैसे करें? (सरल विधि)
अगर आप घर पर सरस्वती पूजा करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए आसान स्टेप्स फॉलो करें:
सुबह स्नान करके साफ पीले या हल्के रंग के वस्त्र पहनें
पूजा स्थान को साफ कर मां सरस्वती की तस्वीर/मूर्ति स्थापित करें
पीले फूल, अक्षत, चंदन, दूर्वा और दीपक अर्पित करें
भोग में ये चीजें रखें:
केसर या पीले रंग वाली मिठाई
बेसन के लड्डू / बूंदी
खिचड़ी
पीले फल (केला, आम आदि)
विद्यार्थियों को किताबें, कॉपी, पेन आदि पूजा में रखने की परंपरा है
सरस्वती वंदना या मंत्र का पाठ करें
अंत में आरती करके प्रसाद बांटें
Saraswati Vandana (सरस्वती वंदना)
या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणा वरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकर प्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेष जाड्यापहा॥
बसंत पंचमी पर क्या करें और क्या न करें?
करें
पीला वस्त्र पहनें और पूजा करें
बच्चों को पढ़ाई, संगीत या कला की शुरुआत कराएं
जरूरतमंदों को पीला भोजन/वस्त्र दान करें
पूजा में साफ-सफाई का ध्यान रखें
न करें
पूजा के समय क्रोध, झगड़ा और अपशब्द से बचें
तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) से दूर रहें
पूजा के बीच में मोबाइल/डिस्ट्रैक्शन से बचें
FAQs
Q1. बसंत पंचमी पर पीला रंग ही क्यों पहनते हैं?
पीला रंग ज्ञान, समृद्धि और वसंत ऋतु की पहचान माना जाता है। यह मां सरस्वती की पूजा से भी जुड़ा होता है।
Q2. बसंत पंचमी 2026 कब है?
पंचमी तिथि 23 जनवरी 2026 को रात 2:28 बजे शुरू होकर 24 जनवरी 2026 को रात 1:46 बजे समाप्त होगी।
Q3. बसंत पंचमी पर पूजा का सबसे शुभ समय क्या है?
पूजा मुहूर्त सुबह 7:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक सबसे शुभ माना गया है।
Q4. सरस्वती पूजा में कौन-सा भोग सबसे अच्छा होता है?
पीली मिठाई (बेसन लड्डू/बूंदी), खिचड़ी और पीले फल भोग के रूप में श्रेष्ठ माने जाते हैं।
Q5. क्या बसंत पंचमी पर नए काम की शुरुआत करना शुभ होता है?
हां, इसे ज्ञान और नई शुरुआत का पर्व माना जाता है। पढ़ाई, संगीत या कला की शुरुआत इस दिन शुभ मानी जाती है।

