हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में दो बार एकादशी आती है, और इन दोनों ही दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। मान्यता है कि एकादशी व्रत रखने से व्यक्ति को मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और पापों से मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है।
इन्हीं महत्वपूर्ण एकादशियों में माघ महीने में आने वाली जया एकादशी को बहुत पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा करते हैं और घर-परिवार में खुशहाली की कामना करते हैं।
जया एकादशी का महत्व और धार्मिक मान्यता
जया एकादशी क्यों मनाई जाती है?
जया एकादशी को विजय और सफलता से जुड़ा पर्व माना जाता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, इस एकादशी का व्रत रखने से:
जीवन में सकारात्मकता और शुभता आती है
धन-समृद्धि बढ़ती है
पुराने कष्ट और पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है
भगवान विष्णु की कृपा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं
जया एकादशी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त
जया एकादशी 2026 कब शुरू होगी और कब समाप्त?
एकादशी शुरू: 28 जनवरी 2026, शाम 4:35 बजे
एकादशी समाप्त: 29 जनवरी 2026, दोपहर 1:55 बजे
पूजा के शुभ मुहूर्त (Vishnu Puja Muhurat)
भक्त नीचे दिए गए समय में विष्णु पूजा कर सकते हैं:
सुबह पूजा मुहूर्त: 7:11 AM से 8:32 AM
दूसरा शुभ समय: 11:14 AM से 1:55 PM
जया एकादशी व्रत के नियम: क्या करें और क्या न करें
जया एकादशी पर क्या करें (Do’s)
यह व्रत सही नियमों के साथ किया जाए तो अधिक फलदायी माना जाता है।
स्वास्थ्य अनुमति दे तो व्रत रखें
कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं
कुछ भक्त फल, दूध और सात्विक आहार लेते हैं
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
विशेष रूप से सूर्योदय से पहले स्नान को शुभ माना जाता है
साफ और हल्के रंग के कपड़े पहनना अच्छा माना जाता है
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें
पूजा में शामिल करें:तुलसी दल
पीले फूल
धूप-दीप
पंचामृत
एकादशी व्रत कथा पढ़ें/सुनें
जया एकादशी कथा श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक मानी जाती है।जप और भजन करें
जैसे:“ॐ नमो नारायणाय” मंत्र
विष्णु सहस्रनाम पाठ
जया एकादशी पर क्या न करें (Don’ts)
अनाज और दालों का सेवन न करें
एकादशी पर यह चीजें वर्जित मानी जाती हैं:चावल
गेहूं
दाल
जौ
शराब और मांसाहार से पूरी तरह बचें
यह तामसिक माने जाते हैं और व्रत की शुद्धता प्रभावित कर सकते हैं।दिन में सोने से बचें
मान्यता है कि दिन में सोने से व्रत का पुण्य कम हो सकता है।व्रत खोलने के बाद अधिक भारी भोजन न करें
पारण के समय हल्का और सात्विक भोजन करना श्रेष्ठ माना जाता है।
पारण समय 2026: व्रत कब और कैसे खोलें?
पारण क्या होता है?
एकादशी व्रत खोलने की प्रक्रिया को पारण कहते हैं। यह द्वादशी तिथि में सही समय पर करना जरूरी माना जाता है।
पारण तारीख: 30 जनवरी 2026
पारण समय: 7:10 AM से 9:20 AM
द्वादशी समाप्त: 11:09 AM
पारण के समय ध्यान रखने योग्य बातें
पहले भगवान विष्णु को भोग लगाएं
तुलसी जल या चरणामृत लेकर पारण करें
तला-भुना और बहुत मसालेदार भोजन न करें
जया एकादशी व्रत में क्या खाएं?
सात्विक फलाहार विकल्प
दूध, दही, छाछ
फल (केला, सेब, पपीता)
सिंघाड़े का आटा
साबूदाना
आलू और शकरकंद
मूंगफली
मखाना
FAQs
1) जया एकादशी 2026 कब है?
जया एकादशी 28 जनवरी 2026 (शाम 4:35 PM से) शुरू होकर 29 जनवरी 2026 (1:55 PM तक) रहेगी।
2) जया एकादशी का व्रत किसके लिए रखा जाता है?
यह व्रत मुख्य रूप से भगवान विष्णु की पूजा के लिए रखा जाता है, साथ ही माता लक्ष्मी की आराधना भी की जाती है।
3) जया एकादशी पर कौन-कौन से भोजन वर्जित हैं?
एकादशी पर चावल, गेहूं, दाल, अनाज, साथ ही शराब और नॉनवेज का सेवन वर्जित माना जाता है।
4) जया एकादशी का पारण कब करें?
पारण 30 जनवरी 2026 को 7:10 AM से 9:20 AM के बीच करना चाहिए।
5) क्या एकादशी पर दिन में सोना अशुभ माना जाता है?
जी हां, धार्मिक मान्यता के अनुसार दिन में सोने से व्रत का पुण्य कम हो सकता है, इसलिए इससे बचने की सलाह दी जाती है।

