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Friday, January 2, 2026
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गिग वर्कर्स के लिए राहत भरा प्रस्ताव: 90 दिन काम पर मिलेगा सोशल सिक्योरिटी कवर

भारत में तेजी से बढ़ती गिग इकॉनमी अब रोजगार का नया चेहरा बन चुकी है। फूड डिलीवरी, कैब सर्विस, ई-कॉमर्स डिलीवरी और ऑनलाइन फ्रीलांसिंग जैसे सेक्टरों में लाखों लोग काम कर रहे हैं। लेकिन लंबे समय तक ये वर्कर्स औपचारिक रोजगार की सुरक्षा और सामाजिक लाभों से वंचित रहे। अब सरकार ने इस अंतर को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।

श्रम मंत्रालय ने प्रस्ताव रखा है कि अगर कोई गिग वर्कर लगातार 90 दिन तक किसी प्लेटफॉर्म के साथ काम करता है, तो उसे सोशल सिक्योरिटी कवर प्रदान किया जाएगा। इसके तहत वर्कर्स को पहचान पत्र (Gig Worker ID), बीमा, पेंशन और अन्य वित्तीय सुरक्षा से जुड़े लाभ मिलने की संभावना है।

क्या मिलेगा गिग वर्कर्स को?

नए प्रस्ताव के तहत वर्कर्स को निम्नलिखित सुविधाओं का लाभ मिल सकता है:

  1. सोशल सिक्योरिटी कवरेज: 90 दिन की निरंतर सेवा के बाद वर्कर को बीमा, पेंशन और स्वास्थ्य लाभ जैसी सुविधाएं मिलेंगी।

  2. यूनीक पहचान पत्र: हर गिग वर्कर को एक यूनिक ID दी जाएगी, जिससे उसकी नौकरी का रिकॉर्ड बनेगा और किसी भी प्लेटफॉर्म पर उसकी सेवाओं की पहचान हो सकेगी।

  3. डेटाबेस निर्माण: सरकार एक केंद्रीकृत पोर्टल पर सभी गिग वर्कर्स का डेटा जोड़ने की योजना बना रही है, जिससे नीतिगत निर्णय लेना आसान होगा।

  4. प्लेटफॉर्म कंपनियों की जवाबदेही: कंपनियों को अपने गिग वर्कर्स के योगदान के अनुपात में सोशल सिक्योरिटी फंड में हिस्सा देना होगा।

भारत में बढ़ रही गिग इकॉनमी

NITI Aayog की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वर्तमान में लगभग 77 लाख गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स हैं, जो 2030 तक बढ़कर करीब 2.35 करोड़ होने का अनुमान है। यह क्षेत्र युवाओं और अर्ध-कुशल कर्मियों के लिए तेजी से रोजगार सृजन कर रहा है। हालांकि, पारंपरिक रोजगार लाभों की कमी के कारण ये वर्कर्स आर्थिक असुरक्षा से जूझते रहे हैं।

सरकार का उद्देश्य

सरकार का मकसद इस सेक्टर को औपचारिक अर्थव्यवस्था के दायरे में लाना है। प्रस्ताव में श्रमिकों की सुरक्षा, सामाजिक पहचान और एक नियमित आय समर्थन प्रणाली शामिल है। यह योजना लागू होने के बाद न सिर्फ वर्कर्स को लाभ मिलेगा, बल्कि गिग इंडस्ट्री में स्थिरता और भरोसा भी बढ़ेगा।

विशेषज्ञों की राय

श्रम विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भारत को “फ्यूचर ऑफ वर्क” की दिशा में आगे ले जाएगा, लेकिन इसके सफल होने के लिए कंपनियों और सरकार दोनों को मिलकर काम करना होगा। नियमों का सुचारू क्रियान्वयन और पारदर्शी प्लेटफॉर्म डेटा शेयरिंग इस योजना की सफलता की कुंजी होगा।

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