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Monday, January 12, 2026
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उपसभापति की कुर्सी खाली होने वाली: हरिवंश आउट, एनडीए किस नए चेहरे पर खेलेगा दांव?

इस साल राज्यसभा में नए उपसभापति का चुनाव लगभग तय माना जा रहा है, क्योंकि मौजूदा डिप्टी चेयरमैन हरिवंश नारायण सिंह का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है और जेडीयू ने संकेत दे दिया है कि उन्हें तीसरी बार राज्यसभा नहीं भेजा जाएगा। ऐसे में एनडीए को नए उपसभापति के लिए नया चेहरा चुनना होगा और इसी को लेकर राजनीतिक गलियारों में कयास तेज हैं।

हरिवंश का कार्यकाल और जेडीयू का रुख

हरिवंश नारायण सिंह 2014 में पहली बार जेडीयू कोटे से राज्यसभा पहुंचे और 2018 में एनडीए उम्मीदवार के तौर पर उपसभापति चुने गए। 2020 में वे दोबारा राज्यसभा सदस्य बने और फिर से डिप्टी चेयरमैन चुने गए, यानी लगातार दो बार इस अहम पद पर रहे।

  • 2025–26 के चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक, बिहार से उनकी राज्यसभा सदस्यता का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को खत्म होना है।

  • पार्टी की नई रणनीति और नेतृत्व बदलावों के बीच उन्हें जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से पहले ही बाहर रखा जा चुका है और अब यह साफ संकेत है कि उन्हें तीसरी बार राज्यसभा नहीं भेजा जाएगा।

संविधान के अनुच्छेद 89 और राज्यसभा के नियमों के अनुसार, जैसे ही किसी सदस्य का राज्यसभा कार्यकाल खत्म होता है, उसके साथ उपसभापति का पद भी स्वतः रिक्त हो जाता है और नए चुनाव कराए जाते हैं।

नया उपसभापति कैसे चुना जाएगा?

राज्यसभा उपसभापति का पद संवैधानिक है और सदन स्वयं अपने किसी सदस्य को इस पद के लिए चुनता है।

  • पद खाली होते ही सभापति (उपराष्ट्रपति) की ओर से चुनाव की तारीख और समय तय किया जाता है।

  • कोई भी सदस्य, लिखित नोटिस के साथ किसी अन्य सदस्य को उम्मीदवार के रूप में प्रस्तावित कर सकता है, जिसे कम से कम एक सदस्य का समर्थन जरूरी होता है।

  • अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे सदस्य प्रस्तावों को सदन के सामने रखते हैं और Voice Vote या जरूरत पड़ने पर डिविजन के माध्यम से निर्णय होता है।

यह पद परंपरागत रूप से सत्तापक्ष के खाते में जाता रहा है, हालांकि चुनाव के समय सहयोगी दलों और क्षेत्रीय पार्टियों की भूमिका अहम रहती है।

नए चेहरों को लेकर कयास क्यों?

एनडीए के पास राज्यसभा में अभी भी स्पष्ट बढ़त है, इसलिए ज्यादातर संभावना यही है कि नया उपसभापति भी एनडीए खेमे से होगा। जेडीयू द्वारा हरिवंश को दोबारा न भेजने के फैसले के बाद यह पद किसी अन्य सहयोगी दल या सीधे बीजेपी के खाते में जा सकता है।

  • राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार, उत्तर प्रदेश या दक्षिण भारत के किसी राज्य से आने वाले वरिष्ठ सांसद को इस पद पर बैठाकर 2029 तक की राजनीति और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश हो सकती है।

  • विपक्ष भी इस चुनाव को प्रतीकात्मक लड़ाई बनाने की कोशिश करेगा, लेकिन संख्याबल एनडीए के पक्ष में होने से परिणाम लगभग पहले से तय माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, हरिवंश के कार्यकाल के साथ राज्यसभा की चेयर बदलने की तय प्रक्रिया शुरू होगी, और अगले कुछ महीनों में यह साफ हो जाएगा कि ऊपरी सदन की नंबर 2 कुर्सी पर अगला चेहरा कौन होगा।

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