बॉलीवुड के 90 के दशक की सबसे चमकदार और यादगार अभिनेत्रियों में से एक उर्मिला मातोंडकर का नाम आता है। उन्होंने कम उम्र से अभिनय की दुनिया में कदम रखा और अपने अभिनय और डांस के ज़रिये दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। उर्मिला का जन्म 4 फरवरी 1974 को मुंबई में हुआ। महज तीन साल की उम्र में उन्होंने बाल कलाकार के रूप में फिल्म कर्म से शुरुआत की, और बचपन में ही मासूम जैसी फिल्मों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। धीरे-धीरे वह इंडस्ट्री में अपना नाम बनाने लगीं।
साल 1991 में उन्होंने नरसिम्हा से बतौर लीड एक्ट्रेस अभिनय किया, लेकिन उनकी असली पहचान 1995 में आई फिल्म रंगीला से हुई। इस फिल्म में उनके डांस, स्टाइल और स्क्रीन प्रेजेंस ने सबका ध्यान खींचा और वह रातों-रात “रंगीला गर्ल” बन गईं।
रंगीला और उसके बाद की शानदार फिल्मों की सफलता
रंगीला के बाद उर्मिला ने लगातार सफल और चुनौतीपूर्ण फिल्मों में काम किया। उन्होंने ग्लैमरस तथा गंभीर दोनों तरह की भूमिकाओं को बखूबी निभाया। सत्या, कौन, मस्त और दौड़ जैसी फिल्मों में उनके विविध किरदारों ने यह साबित किया कि वह केवल सुंदर अभिनेत्री नहीं, बल्कि प्रतिभाशाली कलाकार भी हैं।
इतना ही नहीं, अपने करियर के दौरान उन्होंने इंडस्ट्री की सबसे ज्यादा फीस पाने वाली अभिनेत्रियों में से एक के रूप में भी अपनी पहचान बनाई — कई फिल्मों में वह अपने हीरो से अधिक पारिश्रमिक लेने लगी थीं।
करियर के सबसे ऊँचे मुक़ाम पर लिया बड़ा फैसला
उर्मिला के करियर का सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब उन्होंने अपने करियर के स्वर्णिम दौर में ही फिल्मों से दूरी बनाने का निर्णय लिया। यह निर्णय न तो किसी असफलता या फिल्मी आलोचनाओं की वजह से था, बल्कि उन्होंने इसे अपनी मानसिक संतुलन, व्यक्तिगत चुनाव और जीवन के नए चरण की तैयारी से जोड़ा।
उनका यह कदम कई लोगों के लिए हैरानी भरा था क्योंकि उस समय वह बॉलीवुड के शीर्ष पर थीं। लेकिन उन्होंने साबित किया कि स्टारडम और प्रसिद्धि से ऊपर अपनी प्राथमिकताएँ और संतुलन रखना भी ज़रूरी है।
फिल्मों के बाद जीवन: शादी, राजनीति और सामाजिक रूचि
फिल्मों से दूर होने के बाद उर्मिला ने 2016 में मोहसिन अख्तर मीर से शादी की, जो उनके जीवन का एक नया अध्याय था। इसके बाद उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा और कई सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखी, जिससे उन्होंने एक अलग पहचान बनाई। उन्हें यह भी देखा गया कि फिल्मों के अलावा उनका फोकस समाज और राजनीति की दिशा में भी था।
हालाँकि उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली, पर उनकी कला, अभिनय और फिल्मों में योगदान आज भी दर्शकों के दिलों में ज़िंदा है।
उर्मिला मातोंडकर का प्रभाव और विरासत
उर्मिला मातोंडकर का सफर यह दर्शाता है कि एक कलाकार सिर्फ अपनी लोकप्रियता की ऊँचाइयों तक पहुंचकर संतुष्ट नहीं रहता। उन्होंने अपने करियर के पीक पर भी खुद को नई दिशा देने का साहस दिखाया। उनके फैसले ने यह संदेश दिया कि जीवन की प्राथमिकताएँ बदल सकती हैं, और व्यक्ति को अपने मन और संतुलन के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार है।
आज भी पुरानी पीढ़ी और युवा दर्शक दोनों उनकी फिल्मों को याद करते हैं और उन्हें 90 के दशक की सबसे खास अभिनेत्रियों में गिना जाता है।

