spot_img
Wednesday, January 7, 2026
-विज्ञापन-

More From Author

श्मशान में हेडलाइट की रोशनी में अंतिम संस्कार, प्रशासन की लापरवाही

भरतपुर के बी-नारायण गेट स्थित श्मशान घाट पर सोमवार रात को एक मार्मिक घटना घटी, जहां 70 वर्षीय अशोक के अंतिम संस्कार के लिए कारों की हेडलाइट की रोशनी का सहारा लेना पड़ा। मोरी चार बाग निवासी अशोक के निधन पर परिजन शाम करीब 7 बजे श्मशान पहुंचे, लेकिन वहां घना अंधेरा छाया होने से अंतिम संस्कार की रस्में पूरी करना मुश्किल हो गया।

श्मशान में रोशनी की कमी, परिजनों की मजबूरी

शाम ढलते ही श्मशान परिसर में पूर्ण अंधेरा पसर गया। न तो कोई स्ट्रीट लाइट जल रही थी, न ही जनरेटर या अन्य वैकल्पिक रोशनी की कोई व्यवस्था थी। यहां तक कि श्मशान कर्मचारी भी मौके पर अनुपस्थित थे। परिजनों ने सबसे पहले मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर चिता की तैयारी शुरू की, लेकिन सीमित रोशनी में यह संभव न हो सका। मजबूरी में उन्होंने अपनी कारों और अन्य वाहनों की हेडलाइटें जलाईं और इन्हीं की रोशनी में किसी तरह अंतिम संस्कार की रस्में निभाईं।

यह दृश्य देखकर आसपास के लोग भी स्तब्ध रह गए। परिजनों का कहना था कि इस तरह की स्थिति में किसी भी परिवार को गुजरना नहीं चाहिए। अशोक के बेटे ने बताया कि पिता के निधन से पहले ही परिवार दुख में डूबा था, ऊपर से श्मशान की इस बदहाली ने दर्द और बढ़ा दिया। रात के अंधेरे में चिता का दाह संस्कार पूरा करने के बाद परिजन घर लौटे, लेकिन घटना ने स्थानीय प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए।

प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल

भरतपुर जैसे शहर में श्मशान घाट पर बेसिक सुविधाओं का अभाव होना चिंताजनक है। स्ट्रीट लाइट, जनरेटर, श्मशान कर्मचारी और सुरक्षा जैसी न्यूनतम व्यवस्थाओं के बिना अंतिम संस्कार करना परिवारों के लिए अभिशाप बन गया है। राज्य सरकारें अक्सर बुनियादी ढांचे पर जोर देती हैं, लेकिन श्मशान घाट जैसी महत्वपूर्ण जगहों पर लापरवाही बरती जा रही है। राजस्थान में कई श्मशान घाटों पर इसी तरह की शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बी-नारायण गेट श्मशान पर लाइटिंग व्यवस्था लंबे समय से खराब पड़ी है। नगर निगम को बार-बार शिकायतें की गईं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि श्मशान घाटों को सोलर लाइट्स, CCTV और 24×7 कर्मचारी व्यवस्था से लैस किया जाना चाहिए।

समाज और प्रशासन के लिए चेतावनी

यह घटना केवल भरतपुर तक सीमित नहीं है। देशभर के कई शहरों और गांवों में श्मशान घाटों पर समान समस्याएं हैं। स्ट्रीट लाइट की रोशनी में पढ़ाई, टॉर्च से ऑपरेशन—ये दृश्य गरीबी की मार को दर्शाते हैं। लेकिन कार की हेडलाइट में अंतिम संस्कार जैसी घटना मानवीय संवेदनाओं पर सवाल उठाती है। सरकारों को श्मशान घाटों को प्राथमिकता देनी होगी ताकि किसी परिवार को इस तरह की त्रासदी न झेलनी पड़े।

सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल हो गया है, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं। नगर निगम आयुक्त ने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी और श्मशान में तत्काल रोशनी व्यवस्था कराई जाएगी।

Latest Posts

-विज्ञापन-

Latest Posts