सूर्य देव इस साल दोपहर करीब 3 बजकर 13 मिनट पर मकर राशि में ही प्रवेश करेंगे और यही शुद्ध रूप से संक्रांति का क्षण माना जा रहा है। इसी वजह से 2026 में मकर संक्रांति बुधवार, 14 जनवरी को ही मुख्य रूप से मनाई जाएगी, 15 को नहीं।
3:13 बजे वाला कंफ्यूजन क्या है?
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ज्यादातर पंचांग और ड्रिक पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति का संक्रांति क्षण 14 जनवरी 2026 को दोपहर 3:13 बजे (15:13) के आसपास है (कुछ पंचांग 3:07–3:15 के बीच का अंतर बता रहे हैं)।
चूंकि सूर्य का मकर में प्रवेश दिन के उजाले में, सूर्यास्त से पहले हो रहा है, इसलिए शास्त्रों (धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु आदि) के अनुसार संक्रांति उसी दिन मनाई जाती है, अगले दिन नहीं।
इसलिए “3:13” वाली टाइमिंग बिल्कुल सही है, बस इसे संक्रांति का क्षण समझें, न कि पूरा दिन।
पुण्य काल और पूजा का सही समय
पंचांगों ने इस साल के लिए साफ टाइमिंग दी है:
मकर संक्रांति क्षण: 14 जनवरी 2026, दोपहर 3:13 बजे
महापुण्य काल: लगभग 3:13 बजे से 4:58/5:02 बजे तक (करीब 1 घंटा 45–50 मिनट)।
पुण्य काल: लगभग 3:13 बजे से 5:45–6:15 बजे तक (करीब 2.5–3 घंटे)।
इन्हीं घंटों में
गंगा/नदी में स्नान,
सूर्य को अर्घ्य,
तिल, गुड़, खिचड़ी दान,
जप–तप, संकल्प आदि करना सर्वाधिक शुभ माना गया है।
14 या 15 जनवरी का झंझट कैसे दूर करें?
कंफ्यूजन इसलिए होता है कि कुछ सालों में संक्रांति रात में या देर शाम पड़ जाती है।
नियम सीधा है:
अगर संक्रांति का क्षण सूर्यास्त से पहले हो, तो उसी दिन मकर संक्रांति।
अगर संक्रांति रात/देर शाम होगी, तो अगले दिन मकर संक्रांति मानी जाती है।
2026 में सूर्योदय–सूर्यास्त से पहले ही 3:13 बजे संक्रांति हो रही है, इसलिए मुख्य पर्व 14 जनवरी को ही है।
कुछ परिवार 14 को एकादशी व्रत होने के कारण 15 को खिचड़ी या तिल–गुड़ खाने की परंपरा निभाते हैं, इससे 15 की तारीख भी लोक-परंपरा में जुड़ जाती है, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से पर्व–तिथि 14 ही है।









