बसंत पंचमी, जो ज्ञान, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती के सम्मान में मनाया जाता है, ऋतु परिवर्तन का प्रतीक भी है। हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को यह उत्सव सादगी तथा भक्ति की भावना से मनाया जाता है। इस दिन का प्रमुख धार्मिक पक्ष यह है कि पीले रंग का विशेष महत्व माना जाता है — यही रंग वसंत ऋतु, सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और आशा का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए पूजा में पीले फूल, कपड़े और भोग के रूप में पीले व्यंजन अर्पित किए जाते हैं।
केसरिया भात — Sweet Saffron Rice
महत्त्व और स्वाद
केसरिया भात (या मीठे केसरिया चावल) बसंत पंचमी की भोग थाली में प्रचलित पारंपरिक मिठाई है। बासमती चावल को घी, चीनी, दूध और केसर के साथ पकाकर तैयार किया जाता है, जिससे इसका रंग सुनहरा पीला और सुगंध अत्यंत आकर्षक बनता है। यह मिठाई न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि पूजा के अवसर पर शुभता का प्रतीक भी मानी जाती है।
कैसे बनाएं
चावल को धोकर उबालें। एक पैन में घी गर्म करें, उसमें इलायची डालें और दूध‑चावल मिश्रण में चीनी तथा केसर मिलाकर पकाएं। अंत में सूखे मेवे से सजाएँ।
बेसन का हलवा — Besan Halwa
परंपरा और रंग
बसंत पंचमी के अवसर पर पीले रंग की मिठाइयां देवी को प्रिय मानी जाती हैं। बेसन का हलवा भी इसी श्रेणी में आता है। बेसन (चने के आटे) को घी में भूनकर चीनी तथा केसर मिलाकर तैयार किया जाता है। हलवे का स्वर्णिम रंग और घी की खुशबू पूजा के लिए इसे आदर्श बनाती है।
मुख्य सामग्री
बेसन, देसी घी, चीनी, केसर, इलायची।
बेसन की बर्फी — Besan Barfi
सरल और स्वादिष्ट
बेसन की बर्फी एक और पारंपरिक मिठाई है जिसे घर पर तैयार करना सुलभ है। भुने हुए बेसन में चीनी और इलायची पाउडर मिलाकर सेट किया जाता है। यदि चाहें, तो केसर या हल्दी से हल्का पीला रंग भी दिया जा सकता है, जिससे यह भोग के रूप में और प्रभावी दिखे।
टिप: सजावट के लिए आप ड्राई फ्रूट्स या चांदी का वर्क भी उपयोग कर सकते हैं।
केसर खीर — Kesar Kheer
पूजा में पारंपरिक पसंद
खीर भारतीय त्योहारों का आम हिस्सा है और बसंत पंचमी पर केसर खीर का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। यह चावल, दूध, चीनी और केसर के मिश्रण से तैयार होती है। गाढ़ी, मलाईदार और हल्की मिठास वाली खीर पूजा के भोजन में एक खास स्थान रखती है।
स्वाद का संतुलन:
दूध की मलाई, चावल का मुलायमपन और केसर की सुगंध इस व्यंजन को भोग में विशेष बनाती है।
राजभोग — Rajbhog
राजसी मिठास का अनुभव
राजभोग, बंगाली मिठाई का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह छेने (पनीर) से बने बड़े छोटे गोलों को केसर‑इलायची‑मेवा भरी चाशनी में पकाकर बनाया जाता है और इसका रंग व बनावट दोनों ही बसंत पंचमी की रसधाराओं को प्रतिबिंबित करते हैं।
कैसे बनता है:
दूध को फाड़कर छेना तैयार करें। उसे पीले रंग में गूंधकर मेवे भरें और स्वादिष्ट चाशनी में उबालें। यह भोग प्लेट में सुंदर और स्वादिष्ट प्रतीत होता है।
भोग में पीले रंग का महत्व
पीला रंग बसंत पंचमी पर केवल एक सजावटी रंग नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, प्रकाश, ऊर्जा और शुभ आरंभ का प्रतीक भी माना जाता है। देवी सरस्वती के पूजन में इस रंग के पकवान अर्पित करने से सकारात्मक ऊर्जा तथा मनोवैज्ञानिक संतुलन प्राप्त होने की मान्यता है।
बसंत पंचमी पर मां सरस्वती को पीले रंग के भोग अर्पित करना न सिर्फ परंपरा है बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विश्वास का भी प्रतीक है। केसरिया भात से लेकर राजभोग तक ये पाँच मिठाइयाँ घर पर आसानी से बनाई जा सकती हैं और पूजा में अर्पित करने पर भक्ति की अनुभूति को और ऊँचा करती हैं। इन व्यंजनों में इस्तेमाल सामग्री, रंग और स्वाद, सभी बसंत तथा देवी के गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

