बसंत पंचमी वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है और ज्ञान, कला तथा संगीत की देवी माँ सरस्वती को समर्पित एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है और इसी रंग की व्यंजन बनाकर पूजा में भोग लगाया जाता है। भारत के विभिन्न भागों में इस अवसर पर विशेष पारंपरिक पकवान तैयार किए जाते हैं जो न केवल स्वाद में लाजवाब होते हैं, बल्कि परंपरा का हिस्सा भी हैं।
क्षेत्रीय व्यंजनों की रेंज
गुजराती मूंग ढोकला
गुजरात में बसंत पंचमी के दिन मूंग ढोकला एक प्रसिद्ध नाश्ता है। इसमें पीली मूंग दाल को पीसकर हल्दी, दही और नमक मिलाया जाता है, फिर स्टीम करके ढोकलों के आकार में काटा जाता है। ऊपर से सरसों, हरी मिर्च और हल्का तड़का डालकर परोसा जाता है – रंग में पीला और स्वाद में स्वादिष्ट।
बंगाली पायेश (चीनी खीर)
पायेश, बंगाली संस्कृति में प्रिय मिठाई है। दूध को उबालकर चावल डालकर पकाया जाता है और गुड़ या चीनी मिलाकर गाढ़ा किया जाता है। इलायची पाउडर और सूखे मेवे डालकर इसे सजाया जाता है। यह मीठा व्यंजन खास तौर पर पूजा के भोग में भी लगाया जाता है।
पंजाबी मीठा चावल
पंजाब में इस दिन मीठे चावल यानी प्रसिद्ध मीठा भात भी बनता है। आधा पानी और आधा दूध में चावल पकाकर घी में भूने मेवे, किशमिश और थोड़ा इलायची पाउडर मिलाकर तैयार किया जाता है। गरमा‑गरम परोसें।
अन्य लोकप्रिय व्यंजन
केसर भात / ज़र्दा
यह बेसन व सैफ्रॉन से रंगा हुआ चावल है जो केसर और मेवों के साथ पकाया जाता है। इसका सुनहरा रंग बसंत पंचमी के पीले थीम से मेल खाता है और इसे पूजा भोग में भी लगाया जाता है।
खिचड़ी
खिचड़ी, जो चावल तथा दाल से बनाई जाती है, हल्दी लगाकर पीले रंग की बनाई जा सकती है। यह पौष्टिक तथा स्वादिष्ट व्यंजन त्योहार के अवसर पर एक सहज और स्वास्थ्य‑वर्धक विकल्प है।
मालपुआ और पुरणपोली
उत्तर भारत में मालपुआ (स्वीट पैनकेक) और महाराष्ट्र‑गुजरात में पुरणपोली (मीठी भरवां रोटी) भी बसंत पंचमी पर खाने में खास पसंद की जाती हैं।
बासंती पुलाओ
यह एक खुशबूदार पुलाओ है, जिसे घी, काजू, किशमिश और हल्दी‑केसर के साथ पकाया जाता है। इसका हल्का मीठा स्वाद और पीला रंग इसे त्योहार के मेनू में खास बनाता है।
रेसिपी टिप्स
- पीले रंग का महत्व: हल्दी या केसर जैसे प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर व्यंजनों को बसंत पंचमी की प्रतीकात्मकता के अनुरूप पीला बनाएँ।
- भोजन और पूजा: पूजा के बाद घर‑परिवार और मेहमानों के साथ व्यंजनों का आनंद लेना परंपरा का हिस्सा है।
बसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं, बल्कि यह पारंपरिक व्यंजनों, रंगों और स्वाद का भी उत्सव है। चाहे वह गुजराती ढोकला हो, बंगाली पायेश, पंजाबी मीठा चावल या केसरिया भात — हर व्यंजन में त्योहार की खुशी और सांस्कृतिक गर्मजोशी झलकती है।









