हर साल जनवरी की शुरुआत के साथ ही सोशल मीडिया पर “न्यू ईयर, न्यू मी” का दौर शुरू हो जाता है। कोई हेल्दी रहने का वादा करता है, तो कोई पैसे बचाने या नई स्किल सीखने का। लेकिन कुछ ही हफ्तों में यह जोश ठंडा पड़ जाता है और रेज़ोल्यूशन अधूरे रह जाते हैं। कोलंबिया विश्वविद्यालय की एक स्टडी के मुताबिक, लगभग 75% लोग जनवरी के अंत तक अपने रेज़ोल्यूशन को छोड़ देते हैं, और केवल 10% लोग ही साल के अंत तक उस पर टिक पाते हैं।
लोग रेज़ोल्यूशन क्यों नहीं निभा पाते?
सबसे बड़ा कारण होता है – अवास्तविक लक्ष्य बनाना। लोग अक्सर बहुत बड़े या अस्पष्ट उद्देश्य तय करते हैं जैसे “मैं फिट रहूंगा” या “मैं ज़्यादा पैसे बचाऊंगा”। जब परिणाम जल्दी नहीं दिखते, तो मनोबल टूट जाता है। सफलता पाने के लिए लक्ष्य छोटे, मापने योग्य और स्पष्ट होने चाहिए जैसे “हर दिन 30 मिनट वॉक करूंगा” या “हर हफ्ते 500 रुपये बचाऊंगा।”
दूसरा कारण है प्रेरणा (Motivation) का अस्थायी होना। नए साल की शुरुआत में उत्साह अधिक होता है, लेकिन समय के साथ यह कम होता जाता है। लगातार प्रयास और अनुशासन ही किसी आदत को दीर्घकालिक बनाते हैं।
तीसरा कारण है सपोर्ट सिस्टम की कमी। कई बार लोग रेज़ोल्यूशन को निजी रखते हैं, जबकि अगर परिवार या दोस्तों के साथ साझा किया जाए तो सहयोग और प्रोत्साहन मिलता है।
कैसे निभाएं अपने रेज़ोल्यूशन?
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यथार्थवादी और सीमित लक्ष्य रखें। एक साथ कई बदलाव करने की कोशिश न करें।
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प्रगति पर ध्यान दें, परिपूर्णता पर नहीं। हर छोटी उपलब्धि को सेलिब्रेट करें।
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रूटीन बनाएं। किसी भी आदत को मजबूत करने के लिए नियमितता ज़रूरी है।
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लचीलापन रखें। कभी-कभी असफल होना भी प्रक्रिया का हिस्सा होता है।
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प्रेरणा के स्रोत तलाशें। किताबें, पॉडकास्ट या सहयोगी समूह मदद कर सकते हैं।
मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि हमारा मस्तिष्क परिवर्तन का प्रतिरोध करता है। नई आदतें विकसित करने में औसतन 66 दिन लगते हैं। इसलिए, शुरुआत में आने वाली कठिनाइयां सामान्य हैं। सफलता का रहस्य निरंतरता और आत्मसंयम में छिपा होता है।

