काली मिर्च (Black Pepper) विश्व की सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली मसालों में से एक है। इसे बैंगनी-काले रंग के सूखे फल के रूप में उपयोग किया जाता है, जो खाने में तीखापन, सुगंध और स्वाद प्रदान करता है। घर के गमले से लेकर छोटे बाग तक काली मिर्च की खेती करना अब बहुत से किसान और गृहस्थों के लिए संभव और फायदेमंद हो गया है।
काली मिर्च उष्णकटिबंधीय बेल है, जो गर्म-नमी वाले क्षेत्रों में अच्छी तरह फलती-फूलती है। इसकी खेती से आप बाजार में मिलने वाले मिश्रित या मिलावटी मसालों की बजाय ताजी और शुद्ध काली मिर्च अपने घर पर ही पा सकते हैं।
मौसम और स्थान का चुनाव
काली मिर्च के पौधे को हल्का गर्म और नमी-युक्त वातावरण पसंद है। इसका आदर्श तापमान 20°C से 30°C के बीच होता है, हालांकि यह 15°C से 35°C तक टॉलरेंट हो सकता है। अच्छी वृद्धि के लिए 70-80% आर्द्रता और सालाना पर्याप्त वर्षा चाहिए।
घर में गमले या बगीचे में इसे उगाते समय मिड-डे की तेज रोशनी से बचाएं और पौधे को आंशिक छाया वाली जगह पर रखें। ऐसा करने से पौधे के पत्ते और बेल स्वस्थ बने रहते हैं और जल की बचत भी होती है।
मिट्टी और बगीचे की तैयारी
काली मिर्च को ऐसी मिट्टी पसंद है जिसमें जल निकासी अच्छी हो और पोषक तत्व भरपूर हों। इसके लिए आप गमले में बागवानी मिट्टी, गोबर की खाद (या वर्मी कंपोस्ट) और थोड़ी रेत मिलाकर मिश्रण तैयार करें, जिससे पानी जमा न हो और जड़ें स्वस्थ रहें।
काली मिर्च के लिए लूमी (Loamy) मिट्टी, लाल मिट्टी या सैंडीलोम मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है, जिसमें pH मान लगभग 5.5 से 6.5 हो। यह मिट्टी पौधे की निरोगी वृद्धि और बेहतर पैदावार के लिए उपयुक्त रहती है।
गमले में छेद वाले बर्तन का उपयोग करें ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके और जड़ें सड़े नहीं।
रोपण (Planting) विधि
काली मिर्च को दो मुख्य तरीकों से उगाया जा सकता है — बीज और कटिंग (स्थानीय बेल से टहनी)। हालांकि कटिंग से पौधे जल्दी और अधिक विश्वसनीय रूप से बढ़ते हैं, इसलिए किसान और गार्डनर अक्सर इसी विधि का चयन करते हैं।
बीज लगाने से पहले उन्हें 24 घंटों के लिए पानी में भिगोना चाहिए ताकि अंकुरण क्षमता बढ़े और बीज जल्दी निकलें।
बीज या कटिंग को हल्की गहराई में गमले के मिश्रण में लगाएँ और ऊपर से हल्का मिट्टी का लेयर डालें। इसके बाद हल्का पानी दें ताकि मिट्टी नमी रह सके।
पानी, देखभाल और सहारा
काली मिर्च की बेल एक लता की तरह बढ़ती है, इसलिए इसे सहारा देना अनिवार्य होता है। आप बाँस की डंडियाँ, रेलिंग, दीवार या जाली का सहारा दे सकते हैं, जिस पर बेल चढ़ सके।
सिंचाई को संतुलित रखें — महीनों में लगभग 2-3 बार हल्का पानी देना पर्याप्त है, लेकिन ऐसी स्थिति में पानी न भरें कि मिट्टी बहुत गीली हो जाए।
लगभग हर 20-25 दिन में जैविक खाद डालें ताकि पौधे को आवश्यक पोषक तत्व मिलते रहें। समय-समय पर सूखी पत्तियों और रोगी भागों को हटाते रहना चाहिए, जिससे स्वास्थ्य बेहतर रहता है।
यदि पौधे को सही तरीके से लगाया और देखा जाए, तो कुछ महीनों में इसके बेलों पर फूल और छोटे गुलाबी-हरे काली मिर्च के फल दिखाई देने लगते हैं। पूर्ण पकने पर यह रंग बदलकर चमकीले काले-लाल दिखाई देते हैं।

