Madhya Pardesh News:मध्य प्रदेश की चर्चित तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को पुलिस ने बाढ़ राहत घोटाले के मामले में गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद श्योपुर पुलिस ने उन्हें ग्वालियर स्थित उनके घर से हिरासत में ले लिया। फिलहाल पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है और पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है।
बाढ़ राहत घोटाले का आरोप
यह मामला साल 2021 का है, जब अमिता सिंह तोमर बड़ौदा तहसील में तहसीलदार के पद पर तैनात थीं। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान करीब 2.57 करोड़ रुपए की राहत राशि में गड़बड़ी हुई। जांच में सामने आया कि 794 लोगों को मदद दी जानी थी, लेकिन 127 फर्जी लोगों के खातों में पैसे ट्रांसफर कर दिए गए। हैरानी की बात यह भी रही कि कई बैंक खाते तहसील क्षेत्र से बाहर के थे, जिससे गबन की पुष्टि और मजबूत हुई।
110 लोग बने आरोपी
इस पूरे घोटाले में कुल 110 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें अमिता सिंह तोमर के अलावा करीब 25 पटवारी भी शामिल हैं। जांच पूरी होने के बाद अमिता पर गिरफ्तारी का खतरा बढ़ गया था। विजयपुर तहसीलदार पद से हटाए जाने के बाद आखिरकार उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
सोशल मीडिया पोस्ट से भी विवाद
अमिता सिंह तोमर सिर्फ अपने काम ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी विवादों में रही हैं। अगस्त 2024 में उन्होंने एक राजनीतिक पोस्ट शेयर की थी, जिसमें प्रियंका गांधी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। विवाद बढ़ने पर उन्होंने सफाई दी कि उनका अकाउंट हैक हो गया था। इसके अलावा राहुल गांधी को लेकर भी उनकी टिप्पणियां चर्चा में रही थीं।
केबीसी से मिली थी पहचान
अमिता सिंह तोमर पहली बार साल 2011 में चर्चा में आई थीं, जब उन्होंने टीवी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (केबीसी-5) में भाग लेकर 50 लाख रुपए जीते थे। इसके बाद वह पूरे प्रदेश में जानी जाने लगीं। सोशल मीडिया पर भी उनकी अच्छी खासी मौजूदगी रही है।
लंबे करियर में कई ट्रांसफर
अमिता सिंह तोमर ने साल 2003 में सरकारी सेवा की शुरुआत नायब तहसीलदार के रूप में की थी। साल 2011 में उनका प्रमोशन होकर वह तहसीलदार बनीं। हालांकि, उनके 23 साल के करियर में उन्हें करीब 25 बार ट्रांसफर का सामना करना पड़ा। हाल ही में हुए एक ट्रांसफर के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मदद की गुहार भी लगाई थी।

