ऐप्पल ने पिछले महीने MacBook Neo को उन ग्राहकों के लिए लॉन्च किया था जो बजट में प्रीमियम लैपटॉप का अनुभव चाहते हैं। कंपनी का अनुमान था कि इसकी करीब 50-60 लाख यूनिट्स की बिक्री होगी, लेकिन हकीकत इस आंकड़े से कहीं आगे निकल गई है। अब हालात ये हैं कि इस लैपटॉप को बनाने के लिए जरूरी चिपसेट कम पड़ने लगे हैं, जिसका असर आने वाले समय में इसकी कीमत पर पड़ सकता है।
क्या है चिपसेट का पेच?
मैकबुक नियो की कम कीमत के पीछे ऐप्पल की एक स्मार्ट इंजीनियरिंग तकनीक है।
* आईफोन वाला इंजन: इसमें iPhone 16 Pro वाला A18 Pro चिपसेट इस्तेमाल किया गया है।
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* क्या होती हैं ‘बिन्ड’ चिप्स (Binned Chips)? आईफोन 16 प्रो के लिए जब चिप्स बनती हैं, तो कुछ चिप्स का एक GPU कोर मैन्युफैक्चरिंग के दौरान काम करना बंद कर देता है। इन्हें फेंकने के बजाय ऐप्पल नियो में इस्तेमाल करता है (6-कोर की जगह 5-कोर GPU के साथ)।
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* समस्या: नियो की डिमांड इतनी ज्यादा है कि कंपनी के पास ये ‘रिजेक्टेड’ या ‘बिन्ड’ चिप्स कम पड़ने लगे हैं। अब अगर ऐप्पल को नियो के लिए अलग से नए चिप्स बनवाने पड़े, तो लागत बढ़ जाएगी और कंपनी को लैपटॉप के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं।
: MacBook Neo के फीचर्स
ऐप्पल ने इसे खास तौर पर विंडोज लैपटॉप चलाने वाले छात्रों और ऑफिस प्रोफेशनल को लुभाने के लिए डिजाइन किया है। इसकी प्रमुख खूबियां इस प्रकार हैं:
* डिस्प्ले: 13 इंच का लिक्विड रेटिना डिस्प्ले (500 निट्स ब्राइटनेस)।
* परफॉर्मेंस: ऐप्पल का दावा है कि यह Intel Core Ultra 5 वाले लैपटॉप की तुलना में 50% अधिक फास्ट है।
* कैमरा और ऑडियो: 1080p FaceTime HD कैमरा, डॉल्बी एटमॉस सपोर्ट वाले डुअल साइड स्पीकर्स।
* बैटरी और कीबोर्ड: मैजिक कीबोर्ड, टचआईडी (TouchID) और लंबा बैटरी बैकअप।
क्या आपको अभी खरीद लेना चाहिए?
यदि आप मैकबुक नियो खरीदने का मन बना रहे हैं, तो अभी सही समय हो सकता है। यदि सप्लाई चैन की समस्या बढ़ती है और सप्लायर TSMC से नए चिप्स का ऑर्डर महंगा पड़ता है, तो ऐप्पल आधिकारिक तौर पर इसकी कीमत में 10% से 15% तक की बढ़ोतरी कर सकता है।

