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Wednesday, March 25, 2026
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Gemology: रत्न पहनते समय न करें ये गलती, नहीं तो बढ़ सकती है मानसिक अशांति

Gemology:ज्योतिष शास्त्र में रत्नों को सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि ऊर्जा से जुड़े विशेष माध्यम के रूप में देखा जाता है। माना जाता है कि सही रत्न व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है, जबकि गलत तरीके से धारण किया गया रत्न विपरीत प्रभाव भी डाल सकता है। यही वजह है कि अक्सर सलाह दी जाती है कि किसी दूसरे व्यक्ति की अंगूठी या रत्न पहनने से बचना चाहिए।विशेषज्ञों के अनुसार, अगर बिना सोचे-समझे किसी और का रत्न पहन लिया जाए, तो इससे मानसिक अस्थिरता, करियर में रुकावट या अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

क्यों नहीं पहननी चाहिए किसी दूसरे की अंगूठी?

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार हर रत्न किसी न किसी ग्रह से जुड़ा होता है और वह उसी ग्रह की ऊर्जा को अपने भीतर समाहित करता है। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक किसी रत्न को धारण करता है, तो वह रत्न उसकी व्यक्तिगत ऊर्जा तरंगों के साथ तालमेल बना लेता है।ऐसे में यदि कोई दूसरा व्यक्ति वही रत्न पहन लेता है, तो उसकी ऊर्जा और पहले से मौजूद ऊर्जा के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है।

करियर और मानसिक स्थिति पर असर

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रत्न सिर्फ सकारात्मक ऊर्जा ही नहीं बढ़ाते, बल्कि पहनने वाले व्यक्ति के ग्रहों से जुड़े प्रभावों को भी संतुलित करने का काम करते हैं। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति किसी और का रत्न धारण करता है, तो वह अनजाने में उस व्यक्ति से जुड़े नकारात्मक प्रभावों को भी अपने जीवन में आमंत्रित कर सकता है।
इसी कारण कई बार अचानक करियर में रुकावट, मन में बेचैनी या स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां महसूस होने लगती हैं। हालांकि इन मान्यताओं को वैज्ञानिक दृष्टि से प्रमाणित नहीं माना जाता, लेकिन ज्योतिष में इनका विशेष महत्व बताया गया है।

रखें इन बातों का ध्यान

अगर आप रत्न धारण करना चाहते हैं, तो इसे केवल फैशन के रूप में न अपनाएं। रत्न पहनने से पहले अपनी कुंडली का विश्लेषण कराना जरूरी माना जाता है, ताकि सही ग्रह और सही रत्न का चयन किया जा सके।
इसके अलावा नया रत्न धारण करने से पहले विधि-विधान से उसका पूजन और मंत्रों द्वारा जाग्रत करना भी आवश्यक बताया जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार जाग्रत किया गया रत्न ही अपना प्रभाव दिखाता है।
साथ ही यह भी सलाह दी जाती है कि एक बार रत्न धारण करने के बाद उसे बार-बार न उतारें और न ही किसी अन्य व्यक्ति को ट्रायल के लिए पहनने दें, क्योंकि रत्न की ऊर्जा बेहद व्यक्तिगत मानी जाती है। ऐसे में सही जानकारी और मार्गदर्शन के साथ ही रत्न धारण करना बेहतर माना जाता है।

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