उत्तर प्रदेश में ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी हो गई है, जिसमें विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत कुल 2 करोड़ 88 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। लखनऊ में अकेले 12 लाख वोट कटने से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है।
SIR प्रक्रिया के तहत बड़े बदलाव
चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान चलाया था, जिसके परिणामस्वरूप ड्राफ्ट मतदाता सूची आज जारी की गई। इस प्रक्रिया का उद्देश्य फर्जी, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं को सूची से हटाना था। प्रदेश स्तर पर 2.88 करोड़ नाम कटे हैं, जो कुल मतदाता संख्या का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लखनऊ जिले में 12 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए, जो राज्य की राजधानी होने के नाते सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शुमार है।
क्यों कटे इतने नाम?
SIR प्रक्रिया में बूथ लेवल एजेंट्स (BLO), पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने घर-घर जाकर सत्यापन किया। मुख्य कारण रहे:
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मृत मतदाता: जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है, उनके नाम अभी भी सूची में थे।
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स्थानांतरित मतदाता: दूसरे जिले या राज्य चले गए लोग।
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फर्जी वोटर: डुप्लिकेट या नकली एंट्रीज।
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आयु सीमा: 18 वर्ष से कम उम्र के नाम।
इससे मतदाता सूची की शुद्धता बढ़ेगी और आगामी चुनावों में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
BJP ने इसे “मतदाता सूची शुद्धिकरण का स्वागतयोग्य कदम” बताया, जबकि SP और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि यह “वोट सप्रेसन” का प्रयास है। विपक्ष का कहना है कि गरीब और प्रवासी मतदाताओं को निशाना बनाया गया। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि नाम कटने वालों को आपत्ति दर्ज करने का मौका मिलेगा और अंतिम सूची 35 दिनों में प्रकाशित होगी।
अब आगे क्या होगा?
ड्राफ्ट सूची के खिलाफ दावा-आपत्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कोई भी मतदाता जिसका नाम कटा है, वह 20 जनवरी तक स्थानीय BLO या ऑनलाइन पोर्टल पर आपत्ति दर्ज करा सकता है। अंतिम मतदाता सूची फरवरी 2026 तक तैयार हो जाएगी। यह अभियान लोकसभा चुनावों से पहले मतदाता आधार को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

