नोएडा–ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के समानांतर बनने वाली 45 मीटर चौड़ी यह सड़क फिलहाल ज़मीन विवाद की वजह से फिर अटक गई है, जिससे रोज़ाना जाम झेल रहे हजारों कम्यूटरों को राहत मिलने में देरी हो रही है। सेक्टर 94 से सेक्टर 150 तक प्रस्तावित इस सड़क का लगभग 695 मीटर हिस्सा पांच जगह किसानों की ज़मीन न मिल पाने के कारण अधूरा है और वहीं ट्रैफिक की सबसे बड़ी रुकावट बन रहा है।
सड़क की प्लानिंग और मौजूदा स्थिति
यह 45 मीटर चौड़ी आर्टेरियल रोड सेक्टर 94 से सेक्टर 150 तक नोएडा–ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के समानांतर बनाई जा रही है, आगे चलकर इसे ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र से भी जोड़ा जाना है।
नोएडा अथॉरिटी के सर्वे के मुताबिक, अधिकांश हिस्से में निर्माण हो चुका है, लेकिन लगभग 695 मीटर के पाँच पैच अभी खाली हैं जहां सड़क कट नहीं पाई है।
इन “मिसिंग लिंक” की वजह से गाड़ियां बीच में मुड़कर वापस एक्सप्रेसवे पर जाने को मजबूर हैं, जिस कारण पीक ऑवर में सेक्टर 94–150 बेल्ट पर रोज़ जाम लगता है।
किस–किस जगह अटका काम?
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, पांच लोकेशन पर किसानों से ज़मीन नहीं मिल पाई है।
शहदरा गांव के पास – खसरा नंबर 928 पर किसान कब्जे में है, यहां लगभग 74.20 मीटर लंबाई में सड़क का हिस्सा अटका है।
मोहियापुर गांव के पास – करीब 75 मीटर के हिस्से में सड़क अधूरी है।
बाकी तीन जगह भी इसी तरह छोटे–छोटे पैचों पर अधिग्रहण नहीं हो पाया, जिससे पूरी लाइनियर कनेक्टिविटी टूट जाती है।
इन छोटे गैप्स की वजह से पूरी 25 किलोमीटर की समानांतर रोड अपनी क्षमता के मुताबिक ट्रैफिक नहीं ले पा रही और एक्सप्रेसवे पर ही लोड केंद्रित बना हुआ है।
किस वजह से अटका जमीन अधिग्रहण?
प्राधिकरण को जिन पट्टियों की जरूरत है, वहां के किसानों ने मुआवज़े, पुनर्वास या भूमि उपयोग को लेकर आपत्ति जताई है।
कई जगह किसान या तो मौजूदा रेट से असंतुष्ट हैं, या भविष्य में सड़क और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी बढ़ने पर जमीन के भाव और बढ़ने की उम्मीद में अभी जमीन छोड़ने के पक्ष में नहीं हैं।
कुछ लोकेशन पर पुराने अधिग्रहण विवाद और कोर्ट मामलों की वजह से भी फाइलें अटकी हुई हैं, जिससे निर्माण रोकना पड़ा है।
प्राधिकरण स्तर पर यह माना गया है कि सड़क का डिजाइन तकनीकी रूप से तैयार है, दिक्कत सिर्फ भूमि उपलब्धता की है।
क्या समाधान निकलेगा?
नोएडा अथॉरिटी ने संबंधित गांवों के किसानों के साथ वार्ता फिर से शुरू की है; अधिकारियों के अनुसार, एक लोकेशन पर किसान जमीन देने को तैयार हो गए हैं और वहाँ अधिग्रहण प्रक्रिया लगभग पूरी होने वाली है।
बाकी चार जगह के लिए भी कैंप लगाकर सहमति आधारित अधिग्रहण की कोशिश की जा रही है, ताकि मामले अदालतों में न जाएं और काम जल्द आगे बढ़ सके।
प्राधिकरण का प्लान है कि ये मिसिंग लिंक पूरे होते ही यह 45 मीटर रोड एक्सप्रेसवे का वैलिड विकल्प बन जाएगी, जिससे
ऑफिस आवागमन, सोसाइटी–कॉमर्शियल सेक्टरों का ट्रैफिक एक्सप्रेसवे से हटकर यहां शिफ्ट हो सकेगा
और सेक्टर 94–150–ग्रेटर नोएडा–यमुना सिटी के बीच यात्रा समय और जाम दोनों में कमी आएगी।
फिलहाल, जब तक 695 मीटर के ये टुकड़े नहीं जुड़ते, एक्सप्रेसवे पर जाम की समस्या पूरी तरह खत्म होना मुश्किल माना जा रहा है।

