ग्रेटर नोएडा के डेल्टा सेक्टर में दूषित पानी की आपूर्ति से अब तक 8 लोग अस्पताल पहुंच चुके हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पीने के नलों से सीवर का गंदा पानी मिला हुआ आ रहा है, जो इंदौर के हालिया जल संकट की याद दिला रहा है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण (GNIDA) की लापरवाही सामने आई है, जहां पाइपलाइन में सीवर लीकेज की शिकायतें बढ़ रही हैं।
दूषित पानी से स्वास्थ्य संकट
डेल्टा सेक्टर के निवासियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से नलों से बदबूदार और गंदा पानी आ रहा है। कई परिवारों ने इसे पीने या खाना बनाने में इस्तेमाल किया, जिसके बाद पेट दर्द, उल्टी, दस्त और बुखार जैसे लक्षण दिखने लगे। प्राइम टीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 8 लोग गंभीर रूप से बीमार होकर अस्पताल पहुंचे, जिनमें बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। स्थानीय अस्पतालों में ओपीडी में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई।
यह समस्या ग्रेटर नोएडा में नई नहीं है। पहले भी सुपरटेक इको विलेज, अजनारा होम्स और अन्य सोसाइटियों में दूषित पानी से सैकड़ों लोग बीमार पड़े थे। TDS स्तर 1500-2000 तक पहुंच गया था, जो सुरक्षित सीमा (500) से कहीं अधिक है।
सीवर लीकेज और प्राधिकरण की लापरवाही
निवासियों का आरोप है कि पीने के पानी की पाइपलाइन पुरानी हो चुकी है और सीवर लाइनों से क्रॉस कनेक्शन हो गया है। डेल्टा सेक्टर में सीवर लीकेज की समस्या पुरानी है, जिसकी शिकायतें GNIDA को की गईं लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इंस्टाग्राम और स्थानीय मीडिया पर वायरल वीडियो में गंदा पानी साफ दिख रहा है।
ग्रेटर नोएडा में गंगा जल आपूर्ति 52 सेक्टरों तक पहुंच चुकी है, लेकिन कई इलाकों में अभी भी ग्राउंडवाटर या मिश्रित पानी दिया जा रहा है। प्राधिकरण ने दावा किया है कि 374 MLD आपूर्ति हो रही है, लेकिन गुणवत्ता पर सवाल बने हुए हैं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और जांच
GNIDA अधिकारियों ने मामले को संज्ञान में ले लिया है। जल नमूने एकत्र कर परीक्षण के लिए भेजे गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने हेल्थ कैंप लगाने और प्रभावितों को दवा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जिला मजिस्ट्रेट ने प्राधिकरण को नोटिस जारी करने की बात कही है।
पिछले मामलों में ई.कोलाई बैक्टीरिया पाया गया था, जिसके बाद NGT ने भी हस्तक्षेप किया था। निवासी संगठनों ने प्राधिकरण पर जुर्माना लगाने की मांग की है।
समाधान के उपाय
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पाइपलाइन मरम्मत और सीवर लीकेज ठीक करना।
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नियमित जल परीक्षण और TDS चेक।
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RO प्लांट और फिल्टर की व्यवस्था।
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जन जागरूकता और शिकायत तंत्र मजबूत करना।
ग्रेटर नोएडा जैसे तेजी से बढ़ते शहरों में जल सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए। इंदौर कांड के बाद भी सबक नहीं लिया गया, तो भविष्य में बड़े संकट की आशंका है।

