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Saturday, January 10, 2026
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मेरठ के सरधना में दलित मां की हत्या, बेटी का अपहरण: गांव छावनी में, विधायक अतुल प्रधान को भी घुसने से रोका!

मेरठ के सरधना विधानसभा क्षेत्र के कपसाड़ गांव में दलित महिला की हत्या और उसकी युवती बेटी के अपहरण का मामला अब कानून-व्यवस्था के साथ-साथ बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। शुक्रवार सुबह से ही विभिन्न दलों के नेता गांव पहुंचने लगे, तो पुलिस ने पूरे गांव को सुरक्षा कारणों से छावनी में बदलकर आम प्रवेश पर पाबंदी लगा दी।

वारदात: मां की हत्या, बेटी का अपहरण

गुरुवार सुबह करीब 8 बजे 45 वर्षीय सुनीता (दलित महिला) अपनी 20 वर्षीय बेटी रूबी के साथ खेतों की ओर जा रही थीं। गांव के ही दबंग कंपाउंडर पारस (या पारस सोम/पारस राजपूत के रूप में पहचान) और उसके साथियों ने नहर (रजबाहा) के पास मां-बेटी को रोक लिया और लड़की के साथ छेड़छाड़ व बदतमीजी शुरू कर दी।

  • विरोध करने पर आरोपियों ने सुनीता के साथ गाली-गलौज और मारपीट की, फिर फरसे/धारदार हथियार से उनके सिर पर वार किया।

  • गंभीर रूप से घायल सुनीता को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

  • इसी बीच आरोपी युवती को जबरन बाइक पर बिठाकर ले गया; मां के खून से सनी सड़क और आंखों के सामने बेटी का उठ जाना पूरे गांव में गुस्से की बड़ी वजह बना।

मौत से पहले सुनीता ने बयान में आरोपी का नाम लिया था कि वही उनकी बेटी को उठा ले गया।

गांव में तनाव, पुलिस की छावनी

घटना के बाद जब एंबुलेंस से सुनीता का शव गांव पहुंचा तो आक्रोशित ग्रामीणों ने एंबुलेंस में तोड़फोड़ की और शव पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाने से इनकार कर दिया। दलित समुदाय के लोगों में भारी नाराजगी देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने अतिरिक्त फोर्स तैनात कर गांव को छावनी में बदल दिया।

  • पुलिस ने आरोपी के दादा-दादी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की, जबकि उसके माता-पिता और भाई फरार बताए जा रहे हैं।

  • मेरठ के SSP के अनुसार, युवती की सकुशल बरामदगी और मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पहले 5, अब कुल 10 पुलिस टीमें अलग-अलग संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

सियासत गरमाई, नेताओं का गांव पर ‘नो एंट्री’

  • समाजवादी पार्टी के सरधना विधायक अतुल प्रधान पीड़ित परिवार से मिलने गांव पहुंचे, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा का हवाला देकर उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं दी।

  • गेट पर रोके जाने के बाद अतुल प्रधान सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और सरकार पर दलित उत्पीड़न छुपाने का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की।

  • भीम आर्मी/आज़ाद समाज पार्टी के नेता और कार्यकर्ता भी गांव पहुंचे और पुलिस को 84 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि अगर लड़की बरामद नहीं हुई और आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

  • BSP सुप्रीमो मायावती और SP अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट कर घटना को “बहुत गंभीर” बताया और योगी सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

प्रशासन का तर्क है कि गांव में किसी भी बड़े नेता या भीड़ के प्रवेश से हालात और भड़क सकते हैं, इसलिए फिलहाल केवल सीमित पुलिस और प्रशासनिक टीमों को ही मौके पर जाने दिया जा रहा है।

पुलिस की जांच और अगला कदम

मेरठ पुलिस के मुताबिक, अपहरण की धारा, हत्या (302 IPC) और SC/ST एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

  • पुलिस टीमों ने आसपास के जिलों में संभावित रूट और लोकेशन चिन्हित कर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है; हाईवे, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों पर भी अलर्ट जारी है।

  • SSP विपिन टाडा ने कहा है कि केस की संवेदनशीलता को देखते हुए ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है और आश्वासन दिया गया है कि आरोपी को जल्द पकड़ा जाएगा और युवती को सकुशल बरामद किया जाएगा।

फिलहाल पूरा मामला कानून-व्यवस्था, दलित सुरक्षा और महिला सुरक्षा—तीनों स्तर पर योगी सरकार के लिए बड़ा परीक्षण बन गया है, जबकि पीड़ित परिवार न्याय और बेटी की सुरक्षित वापसी की प्रतीक्षा में है।

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