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Thursday, January 8, 2026
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दर्द की गोली बनी जहर: पैकेट समेत निगली टेबलेट से 75 वर्षीय बुजुर्ग की आंतें फटीं

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जोड़ों के दर्द से राहत के लिए ली गई एक साधारण गोली ने 75 वर्षीय बुजुर्ग की जान पर बनाई ली। मेडिकल स्टोर से खरीदी दवा की टेबलेट को बुजुर्ग ने ब्लिस्टर रैपर समेत निगल लिया, जिससे उनकी आंतें फट गईं और हालत गंभीर हो गई। समय रहते बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर के डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर उनकी जान बचा ली।

घटना का विवरण

कुशीनगर के एक गांव में रहने वाले 75 वर्षीय बुजुर्ग लंबे समय से जोड़ों के दर्द से परेशान थे। स्थानीय मेडिकल स्टोर से दर्द निवारक दवा खरीदी और बिना ध्यान दिए टेबलेट को उसके प्लास्टिक ब्लिस्टर पैकेजिंग समेत मुंह में डाल लिया। कुछ ही घंटों बाद उन्हें तेज पेट दर्द, उल्टी और सांस लेने में तकलीफ शुरू हो गई। परिजनों ने उन्हें तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया, लेकिन हालत बिगड़ने पर गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।

चिकित्सकों की सतर्कता और सर्जरी

अस्पताल पहुंचने पर एक्स-रे और सीटी स्कैन से पता चला कि ब्लिस्टर पैकेज आंतों में फंस गया है, जिससे छेद हो गया और पेरिटोनाइटिस (पेट में संक्रमण) फैल गया। सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने तुरंत इमरजेंसी ऑपरेशन किया। उन्होंने आंतों से प्लास्टिक पैकेज निकाला, क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत की और एंटीबायोटिक्स देकर संक्रमण नियंत्रित किया। डॉक्टरों के अनुसार, दो-चार घंटे की और देरी होती तो जान बचाना असंभव था। वर्तमान में बुजुर्ग खतरे से बाहर हैं, लेकिन पूर्ण रिकवरी में समय लगेगा।

ऐसी भूलों के खतरे

यह घटना दवा लेने में लापरवाही के गंभीर परिणामों को उजागर करती है। ब्लिस्टर पैकेजिंग को निगलने से निम्नलिखित जटिलताएं हो सकती हैं:

  • आंतों में छेद: प्लास्टिक कठोर होता है, जो पाचन तंत्र को चोट पहुंचाता है।

  • संक्रमण: छेद से बैक्टीरिया पेट की गुहा में फैल जाते हैं।

  • रक्तस्राव और सेप्सिस: जानलेवा स्थिति बन सकती है।

  • श्वसन समस्या: यदि ऊपरी पाचन मार्ग में अटके।

विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्गों, बच्चों और कम दृष्टि वाले लोगों में ऐसी गलतियां आम हैं। दवा हमेशा साफ रोशनी में निकालें, पैकेजिंग फेंकने से पहले जांचें।

जागरूकता और सावधानियां

मेडिकल स्टोर संचालकों को ग्राहकों को चेतावनी देनी चाहिए। आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य शिक्षा में ऐसी जानकारियां शामिल होनी चाहिए। परिजनों ने बताया कि बुजुर्ग अशिक्षित थे और दर्द से व्याकुलता में भूल हो गई। डॉक्टरों ने सलाह दी:

  • दवा निकालने से पहले चश्मा लगाएं।

  • बच्चों को दवा न छूने दें।

  • स्पष्ट लेबल वाली दवाएं ही खरीदें।

  • संदेह हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।

यह मामला स्वास्थ्य जागरूकता की आवश्यकता दर्शाता है। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल साक्षरता बढ़ाने की जरूरत है।

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