बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने साफ कर दिया है कि पार्टी अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 समेत देश के सभी छोटे–बड़े चुनाव अकेले लड़ेगी और किसी भी दल के साथ चुनावी गठबंधन नहीं करेगी। लखनऊ में अपने 70वें जन्मदिन पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए उन्होंने इसे पार्टी की साफ रणनीति बताते हुए दावा किया कि 2027 में BSP पूर्ण बहुमत के साथ यूपी में अपनी पांचवीं सरकार बनाएगी।
मायावती का बड़ा ऐलान क्या है?
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मायावती ने कहा कि BSP ने तय किया है कि अब से सभी चुनाव – लोकसभा, विधानसभा, नगर निकाय और उपचुनाव – अकेले लड़े जाएंगे, किसी प्रकार का गठबंधन नहीं होगा।
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उन्होंने दो टूक कहा, “इस पर कोई कंफ्यूजन नहीं होना चाहिए। बहुजन समाज पार्टी 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अकेले ही लड़ेगी।”
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BSP चीफ का दावा है कि प्रदेश की जनता एक बार फिर पार्टी को सत्ता में लाने के मूड में है और कार्यकर्ता “फुल मेजॉरिटी” की तैयारी में जुटे हैं।
गठबंधन से दूरी क्यों?
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मायावती ने कहा कि पिछले अनुभवों में गठबंधन ने BSP को नुकसान ही पहुंचाया है, जबकि गठंधन सहयोगी दलों को फायदा हुआ।
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1993, 1996, 2002 और बाद के चुनावों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि
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साथ लड़ने पर BSP का वोट तो ट्रांसफर होता है,
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लेकिन साझीदार दलों का वोट बेस उसी अनुपात में BSP को नहीं मिलता।
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उन्होंने सपा, कांग्रेस और अन्य पार्टियों को “जाति–आधारित” मानसिकता वाला बताते हुए कहा कि BSP ऐसी राजनीति से दूरी बनाकर स्वतंत्र ताकत के रूप में लड़ना चाहती है।
हालांकि मायावती ने यह भी जोड़ा कि भविष्य में अगर कभी उन्हें लगे कि कोई दल वास्तविक रूप से अपना वोट – खासकर सवर्ण वोट – BSP को ट्रांसफर करा सकता है, तो वर्षों बाद किसी संभावित गठबंधन पर विचार किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल ऐसी संभावना नहीं है।
EVM पर सवाल और 2027 की तैयारी
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती ने EVM पर भी सवाल उठाए और कहा कि पूर्व चुनावों में गड़बड़ी और बेईमानी के आरोप लगे हैं, लेकिन इसके बावजूद BSP पूरे दम–खम के साथ चुनाव मैदान में उतरती रहेगी।
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उन्होंने कहा कि पूरे देश में EVM के विरोध की आवाज़ें तेज़ हो रही हैं, फिर भी BSP अपनी संगठनात्मक ताकत बढ़ाने और बूथ स्तर तक कैडर मजबूत करने पर फोकस करेगी।
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2027 को लक्ष्य बनाकर उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि
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दलित, पिछड़े, मुस्लिम, सवर्ण गरीब और अन्य बहुजनों के वोट को एकजुट करने की रणनीति पर काम करें,
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और “केंद्र व राज्य की सरकारों की नीतियों से परेशान जनता को BSP का विकल्प” स्पष्ट रूप से दिखाएं।
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