नोएडा में सीवर सफाई कर्मियों की सुरक्षा को लेकर अब काम करने का तरीका बदलने जा रहा है। जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों को साफ निर्देश दिया गया है कि सीवर या नाले में कर्मियों को उतारने से पहले उनकी अनिवार्य स्वास्थ्य जांच कराई जाए और हाथ से सफाई पूरी तरह बंद रखते हुए सिर्फ मशीनों के ज़रिए ही सफाई कराई जाए।
क्या बदला नोएडा के लिए?
राष्ट्रीय सफाई कर्मी आयोग (National Safai Karamcharis Commission) ने गौतमबुद्ध नगर (नोएडा–ग्रेटर नोएडा) के अधिकारियों की समीक्षा बैठक में निर्देश दिया कि मैनुअल स्कैवेंजिंग और खतरनाक तरीके से सीवर सफाई पर सख़्त रोक लागू की जाए।
आदेश के तहत अब:
किसी भी सफाईकर्मी को सीवर या नाले में उतारने से पहले स्वास्थ्य जांच कैंप/मेडिकल स्क्रीनिंग जरूरी की जाएगी।
केवल मशीनों से सीवर–ड्रेनेज सफाई की जाएगी; बिना मशीन, रस्सी या सीढ़ी के अंदर भेजना कानूनन अपराध माना जाएगा।
शहरी निकायों को पर्याप्त मशीनें, सक्शन–जेटिंग वाहन, रोबोटिक या मैकेनिकल उपकरण खरीदने के लिए केंद्र की ‘नमस्ते’ और अन्य योजनाओं के तहत फंड/स्कीमों का उपयोग करने को कहा गया है।
कानून और आयोग की सिफारिशें
Prohibition of Employment as Manual Scavengers and their Rehabilitation Act, 2013 के तहत:
मैनुअल स्कैवेंजिंग, सीवर–सेप्टिक टैंक की हाथ से सफाई और बिना सुरक्षा उपकरण के अंदर उतरने पर प्रतिबंध है।
स्थानीय निकाय, निजी एजेंसी या कोई ठेकेदार ऐसे काम के लिए मजदूर लगाता है तो यह कानून का उल्लंघन माना जाता है।
राष्ट्रीय सफाई कर्मी आयोग ने अपनी पूर्व रिपोर्टों में सिफारिश की थी कि:
5 साल की निश्चित समयावधि में पूरी तरह मैकेनाइज़्ड सीवर–सेप्टिक सफाई लागू की जाए।
“ज़ीरो टॉलरेंस” पॉलिसी अपनाकर हाथ से सफाई पूरी तरह खत्म की जाए और उसके बाद किसी भी मौत/दुर्घटना पर संबंधित विभाग की जिम्मेदारी तय हो।
नोएडा–ग्रेटर नोएडा में हाल की समीक्षा के बाद अब इन्हीं सिफारिशों को ज़मीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
क्यों ज़रूरी हुई स्वास्थ्य जांच और मशीन से सफाई?
देशभर में पिछले वर्षों में सीवर/मैनहोल में उतरकर सफाई करने वाले सैकड़ों सफाईकर्मी जहरीली गैसों (मीथेन, हाइड्रोजन सल्फाइड आदि) के कारण दम घुटने से अपनी जान गंवा चुके हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, सिर्फ दिल्ली–एनसीआर में ही 1994 के बाद से सीवर–ड्रेनेज में उतरने वाले 80 से ज्यादा मजदूरों की मौत दर्ज की गई है।
आयोग ने पाया कि कई बार
पहले से बीमार या कमजोर स्वास्थ्य वाले कर्मियों को टैंकों में उतार दिया जाता है,
गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन मास्क, हार्नेस, सेफ्टी सूट और फर्स्ट–एड जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं दी जातीं।
इसी पृष्ठभूमि में नोएडा में अब प्रावधान किया गया है कि हर सफाईकर्मी की नियमित स्वास्थ्य जांच, ट्रेनिंग, और मशीन के सुरक्षित इस्तेमाल की ट्रेनिंग अनिवार्य रूप से कराई जाए।
प्रशासन को क्या–क्या करना होगा?
राष्ट्रीय सफाई कर्मी आयोग की गाइडलाइन के तहत ज़िला प्रशासन और शहरी निकायों को कई काम समानांतर करने होंगे।
मैकेनाइजेशन बढ़ाना:
हर नगर निगम/विकास प्राधिकरण को जेटिंग–सक्शन मशीन, सीवर क्लीनिंग मशीन, मिनी–जेटिंग, रोबोटिक क्लीनर आदि पर्याप्त संख्या में खरीदने–तैनात करने होंगे।
सेफ्टी और ट्रेनिंग:
सफाईमित्रों के लिए गैस डिटेक्टर, सेफ्टी बेल्ट, PPE किट, गमबूट, ग्लव्स और हेलमेट उपलब्ध कराना और इनके इस्तेमाल पर ट्रेनिंग देना।
नियमित हेल्थ चेक–अप कैंप, फर्स्ट–एड और इमरजेंसी रिस्पांस ट्रेनिंग।
मॉनिटरिंग और जवाबदेही:
ज़िला स्तर पर मॉनिटरिंग कमेटियां सक्रिय रखना, जो समय–समय पर सीवर सफाई की प्रक्रिया, सेफ्टी स्टैंडर्ड, और दुर्घटना मामलों की समीक्षा करें।
किसी भी उल्लंघन पर संबंधित विभाग, ठेकेदार या एजेंसी की जिम्मेदारी तय करना।
जनजागरूकता और हेल्पलाइन:
सफाई संबंधी शिकायतों और असुरक्षित प्रैक्टिस की रिपोर्टिंग के लिए 14420 हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों को प्रचारित करना।

