गौतम बुद्ध नगर में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के दौरान मतदाता सूची की बड़ी खामियां सामने आई हैं। प्रशासन की जांच में 1.76 लाख से ज्यादा मतदाताओं का विवरण अधूरा या संदिग्ध पाया गया है, जिनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो या तो अपने पते पर अनुपस्थित हैं या जिनके मृत होने की सूचना मिली है। अब ऐसे सभी मतदाताओं को नोटिस भेजकर उनकी एंट्री की पुष्टि या हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
SIR में क्या मिला, कितने वोटर संदिग्ध?
निर्वाचन आयोग के निर्देश पर गौतम बुद्ध नगर जिले में 62 दिन का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान चलाया गया, जिसमें घर–घर जा कर मतदाताओं का सत्यापन किया गया।
इस दौरान तैयार हुई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में करीब 24% पुराने मतदाताओं को ASD (Absent, Shifted, Dead) वर्ग में पाया गया, यानी बड़ी संख्या में लोग अपने दर्ज पते पर नहीं मिले, दूसरी जगह शिफ्ट हो गए या उनकी मृत्यु हो चुकी थी।
अलग–अलग कैटेगरी मिलाकर जिले में लगभग 1.76 लाख से अधिक मतदाताओं का विवरण अधूरा, अस्पष्ट या ‘अनमैप्ड’ पाया गया है, जिनकी 2003 के बेस रोल से मैचिंग या वर्तमान पते की पुष्टि नहीं हो सकी।
अधिकारियों के अनुसार, यह साफ संकेत है कि पिछले कई सालों से मतदाता सूची में अपडेट और डिलीशन का काम व्यवस्थित तरीके से नहीं हो पा रहा था।
नोटिस भेजने की तैयारी, प्रक्रिया क्या होगी?
SIR के ड्राफ्ट रोल के साथ ही सुनवाई (hearings) और नोटिस चरण शुरू हो चुका है।
जिन मतदाताओं का विवरण अधूरा है या जो “अनमैप्ड/ASD” श्रेणी में हैं, उन्हें अब
व्यक्तिगत नोटिस,
स्थानीय BLO के माध्यम से सूचना,
और बूथ–लेवल विशेष कैंपों के जरिए जानकारी दी जाएगी कि वे अपना विवरण लेकर उपस्थित हों।
यदि नोटिस मिलने के बाद भी निर्धारित समय सीमा में
व्यक्ति खुद या परिवार का कोई सदस्य सामने नहीं आता,
या दस्तावेजों से पहचान/पता सही साबित नहीं होता,
तो उनकी प्रविष्टि को अंतिम मतदाता सूची से हटाने (डिलीशन) पर निर्णय लिया जाएगा।
जिला प्रशासन ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट, औद्योगिक क्षेत्रों, यूनिवर्सिटी–कैंपस और हाईराइज़ सोसाइटियों में स्पेशल वेरिफिकेशन कैंप भी लगाने शुरू कर दिए हैं, ताकि फ्लोटिंग और रेंटल आबादी वाले इलाकों में भी मतदाता खुद आकर अपना नाम चेक कर सकें।
अनुपस्थित और मृत मतदाताओं के नाम क्यों बड़ा मुद्दा?
बीते वर्षों में कई चुनावों के बाद पार्टियों और नागरिक संगठनों ने आरोप लगाया था कि मतदाता सूचियों में मृत, डुप्लीकेट और फर्जी नाम बने रहने से वास्तविक मतदान प्रतिशत और बूथवार आंकड़े विकृत हो जाते हैं।
SIR की ताज़ा रिपोर्ट दिखाती है कि गौतम बुद्ध नगर जैसे तेज़ी से शहरीकृत, उच्च–माइग्रेशन वाले ज़िले में
बड़ी संख्या में लोग नौकरी या मकान बदलकर दूसरी जगह चले जाते हैं,
लेकिन पुराने पते वाली एंट्री सालों तक बनी रहती है।
चुनाव आयोग पूरे देश में विशेष गहन पुनरीक्षण के जरिए
ASD (Absent, Shifted, Dead) और
डुप्लीकेट/फर्जी मतदाताओं को हटाकर सूची को साफ करना चाहता है, ताकि फर्जी वोटिंग की आशंका कम हो और “एक व्यक्ति, एक वोट, एक जगह” का सिद्धांत सही मायने में लागू हो सके।
गौतम बुद्ध नगर में मिले 1.76 लाख से ज्यादा संदिग्ध/अधूरे एंट्री इसी बड़े नेशनल ड्राइव का हिस्सा हैं।
मतदाताओं और पार्टियों के लिए क्या मायने?
आम मतदाता के लिए
अगर किसी का नाम “ASD” या “अनमैप्ड” लिस्ट में है और वह वास्तव में उसी पते पर रह रहा है, तो उसे तुरंत फॉर्म–8 या सुधार प्रक्रिया के जरिए अपने विवरण की पुष्टि करनी होगी, नहीं तो नाम कट सकता है।
राजनीतिक पार्टियों के लिए
यह डेटा महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पता चलेगा कि किन बूथों पर माइग्रेशन, अनुपस्थिति या डिलीशन की दर सबसे ज्यादा है, जिससे भविष्य की बूथ–मैनेजमेंट और वोटर–कॉन्टैक्ट रणनीति प्रभावित होगी।
जिला प्रशासन ने कहा है कि SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 तक प्रकाशित की जाएगी, जिसमें सभी दावों–आपत्तियों और सुधारों को शामिल किया जाएगा।

