बरेली नगर निगम ने खलीलपुर रोड पर सड़क चौड़ीकरण की योजना के तहत करीब 300 मकानों को अवैध अतिक्रमण की श्रेणी में चिन्हित कर दिया है, जिससे इलाके में तनाव और अनिश्चितता बढ़ गई है। निगम की टीम ने इन मकानों पर लाल निशान लगाकर साफ चेतावनी दी है कि यदि लोगों ने खुद से निर्माण नहीं हटाया तो बुलडोजर से कार्रवाई की जाएगी और खर्च भी मकान मालिकों से वसूला जाएगा।
क्या है मामला, कहां लगे लाल निशान?
-
यह कार्रवाई सीबीगंज थाना क्षेत्र की खलीलपुर रोड पर चल रही है, जहां नगर निगम सड़क चौड़ीकरण और सीएम ग्रिड योजना के तहत अवैध निर्माण हटाने की तैयारी में है।
-
निगम अधिकारियों के मुताबिक, लोगों ने वर्षों से सरकारी जमीन पर कब्जा कर पक्के मकान, दुकानें और निकासी से बाहर निकली दीवारें–बरामदे बना लिए हैं, जो प्रस्तावित चौड़ी सड़क के बीच आ रहे हैं।
-
इसी कड़ी में टीम ने खलीलपुर रोड पर लगभग 300 मकानों को अतिक्रमण की श्रेणी में चिन्हित करते हुए दीवारों पर लाल क्रॉस/निशान बना दिए हैं।
नगर निगम संपत्ति प्रभारी अधिशासी अभियंता राजीव राठी ने कहा है कि ये सभी निर्माण सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे हैं और नियत समय तक इन्हें हटाना होगा, नहीं तो निगम खुद कार्रवाई करेगा।
नगर निगम की चेतावनी और कार्रवाई की प्रक्रिया
-
निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर लोगों को मौखिक और लिखित नोटिस दिए हैं कि वे खुद अपना अतिक्रमण निर्धारित समय सीमा के भीतर हटा लें।
-
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि
-
बुलडोजर से कार्रवाई होने पर ढहाए जाने का खर्च भी कब्जेदारों से ही वसूला जाएगा।
-
बीच में किसी तरह का विरोध या बाधा हुई तो पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई की जाएगी।
-
-
इससे पहले मिनी बाइपास–झुमका तिराहा रोड और अन्य इलाकों में भी नगर निगम 300 से ज्यादा कब्जेदारों को नोटिस देकर सड़क चौड़ीकरण में आ रही बाधा हटाने के निर्देश दे चुका है।
अधिकारियों का तर्क है कि खलीलपुर रोड पर मौजूद अतिक्रमण हटने से न सिर्फ सड़क चौड़ी होगी, बल्कि ज़ोन की ट्रैफिक व ड्रेनेज व्यवस्था भी बेहतर हो सकेगी।
स्थानीय लोगों का विरोध और सवाल
-
प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके मकान कोई नए नहीं, बल्कि लगभग 80–100 साल पुराने हैं और यह इलाका दशकों से आबाद बस्ती है, अचानक इन्हें अतिक्रमण बताकर गिराने की बात अन्यायपूर्ण है।
-
कई लोगों का दावा है कि
-
खलीलपुर रोड पहले से ही लगभग 12 मीटर चौड़ी है,
-
सड़क के साथ नाला भी बना हुआ है,
-
ऐसे में सवाल है कि इसे और कितना चौड़ा किया जाएगा और क्या इसका वैकल्पिक डिज़ाइन नहीं हो सकता।
-
-
स्थानीय निवासियों ने नगर निगम पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा कि
-
कुछ चुनिंदा मकानों पर ही निशान लगाए गए हैं,
-
जबकि दूसरी ओर के निर्माण को “नजरअंदाज़” किया जा रहा है।
-
लोग मांग कर रहे हैं कि अगर सड़क चौड़ीकरण सार्वजनिक हित में जरूरी है, तो या तो वाजिब मुआवज़ा और पुनर्वास दिया जाए या फिर ऐसी प्लानिंग की जाए जिससे पूरी बस्ती उजड़ने से बच सके।
आगे क्या हो सकता है?
-
नगर निगम की ओर से फिलहाल रुख सख्त है और स्पष्ट संदेश दिया गया है कि नियमित कब्जे और अवैध कब्जे के बीच अंतर रखते हुए जहां भी अतिक्रमण पाया जाएगा, हटाया जाएगा।
-
अगर प्रभावित लोग नोटिस के खिलाफ अदालत जाते हैं, तो मामला कानूनी लड़ाई का रूप भी ले सकता है, जैसा कि कई शहरों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण विरोधी अभियानों के दौरान देखा गया है।
-
शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि बरेली जैसे बढ़ते शहरों में सड़क चौड़ीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड जरूरी है, लेकिन इसके साथ मानवीय दृष्टि और पारदर्शी सर्वे–मुआवज़ा प्रक्रिया भी उतनी ही अहम है, ताकि विकास और बस्ती–दोनों के बीच संतुलन कायम रह सके।

