देशभर में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि इसी के तहत चुनाव आयोग ने पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश और उनकी पत्नी को भी पहचान साबित करने के लिए नोटिस भेज दिया है। एडमिरल अरुण प्रकाश ने जहां खुद को किसी भी “स्पेशल प्रिविलेज” से साफ इनकार किया है, वहीं SIR फॉर्म और प्रक्रिया की खामियों पर तीखी आपत्ति दर्ज कराई है।
SIR क्या है और नोटिस क्यों?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन चुनाव आयोग की वह विशेष प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची (इलेक्टोरल रोल) से डुप्लीकेट, मृत या गलत एंट्री हटाने और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने के लिए फील्ड वेरिफिकेशन और डेटा–क्लीनअप किया जाता है।
आयोग ने हाल के दौर में डुप्लीकेशन और “लॉजिकल डिस्क्रेपनसी” पकड़ने के लिए एल्गोरिदम और सॉफ्टवेयर आधारित सिस्टम का इस्तेमाल शुरू किया है, जो संदिग्ध एंट्री को “unmapped” या doubtful के रूप में फ्लैग करता है।
ऐसे सभी unmapped मतदाताओं को नोटिस भेजकर 15 या 30 दिन के भीतर पहचान और नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने को कहा जा रहा है; जवाब न मिलने या संतोषजनक दस्तावेज न मिलने पर नाम काटने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
इसी प्रक्रिया में गोवा में बसे एडमिरल अरुण प्रकाश और उनकी पत्नी के नाम भी “unmapped” कैटिगरी में आ गए, जिसके बाद उन्हें पहचान साबित करने के लिए बुलाया गया।
https://x.com/arunp2810/status/2010237183224098828
एडमिरल अरुण प्रकाश की आपत्ति क्या है?
पूर्व नौसेना प्रमुख, वीर चक्र सम्मानित एडमिरल (रिटायर्ड) अरुण प्रकाश गोवा में 2002 से रह रहे हैं और लंबे समय से वहां वोटर के रूप में पंजीकृत हैं।
नोटिस में कहा गया कि राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी उनके और उनके रिश्तेदारों को “registered electors” के रूप में स्थापित नहीं कर पा रहे, इसलिए उन्हें दस्तावेज लेकर सुनवाई में उपस्थित होना होगा।
एडमिरल ने एक्स (X) पर लिखा कि
अगर SIR फॉर्म्स से पर्याप्त जानकारी नहीं मिल रही तो फॉर्म को ही संशोधित किया जाना चाहिए।
बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) तीन बार घर आ चुके हैं, वे अतिरिक्त जानकारी वहीं पूछ सकते थे।
82 और 78 वर्ष की उम्र में पति-पत्नी को 18 किमी दूर दो अलग-अलग तारीखों पर बुलाना अव्यवहारिक है।
उन्होंने यह भी साफ कहा कि वह किसी प्रकार की विशेष छूट नहीं चाहते और नोटिस का पालन करते हुए दस्तावेज लेकर जाएंगे, लेकिन इस अनुभव से साफ है कि प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है।
विवाद क्यों गहरा रहा है?
एडमिरल अरुण प्रकाश अकेले नहीं हैं; गोवा के साउथ गोवा से कांग्रेस सांसद कैप्टन विरियातो फर्नांडीस को भी SIR के तहत पहचान साबित करने का नोटिस भेजा गया, जबकि वे 2024 लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार के रूप में पहले ही आयोग की विस्तृत जांच से गुजर चुके हैं।
कैप्टन फर्नांडीस ने कहा कि अगर एक मौजूदा सांसद और पूर्व नौसेना अधिकारी को इस तरह की नोटिस मिल सकती है, तो आम नागरिकों पर क्या बीत रही होगी, यह आसानी से समझा जा सकता है।
सिविल सोसायटी और विपक्षी दलों का आरोप है कि एल्गोरिदम–आधारित “संदिग्ध वोटर” लिस्ट और जल्दबाजी में चल रहे फील्ड वेरिफिकेशन की वजह से genuine मतदाताओं के नाम भी खतरे में पड़ सकते हैं, जिससे उन्हें वोट देने के अधिकार से वंचित किया जा सकता है।
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने एडमिरल अरुण प्रकाश को नोटिस भेजे जाने को चुनाव आयोग की “बड़ी चूक” बताते हुए सवाल उठाए, हालांकि एडमिरल ने खुद किसी विशेष व्यवहार की मांग को खारिज किया और ध्यान फॉर्म–डिजाइन और प्रक्रिया की खामियों पर रखा।
चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक लाइन यह है कि SIR का मकसद मतदाता सूची को ज़्यादा साफ और भरोसेमंद बनाना है, न कि किसी विशेष वर्ग को टारगेट करना।
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उसका पुराना de‑duplication सॉफ्टवेयर खामियों वाला था, इसलिए अब संशोधित एल्गोरिदम और फील्ड वेरिफिकेशन के संयोजन से SIR चलाया जा रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, क्रिसमस 2025 के आसपास राज्यों को मौखिक निर्देश दिए गए कि BLO संदिग्ध/अनमैप्ड वोटर्स के लिए फील्ड विज़िट, लिखित अंडरटेकिंग और 12 स्वीकृत दस्तावेज़ों (जैसे पासपोर्ट, आधार, ड्राइविंग लाइसेंस आदि) में से कोई एक लेकर mapping सुनिश्चित करें, लेकिन विस्तृत लिखित SOP अभी स्पष्ट नहीं है।
एडमिरल अरुण प्रकाश के मामले में भी चुनाव अधिकारियों ने मीडिया से कहा कि वे उनसे संपर्क कर प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश करेंगे, लेकिन SIR के नियमों के तहत डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन करना जरूरी है।

