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Saturday, January 10, 2026
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कॉर्बेट सफारी में अब मोबाइल पूरी तरह बैन: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नया नियम, उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई

उत्तराखंड के कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में अब सफारी के दौरान मोबाइल फोन ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद लागू किया गया, जिसमें बाघ रिजर्व के कोर क्षेत्र में मानवीय हस्तक्षेप, शोर और विजुअल डिस्टर्बेंस कम करने के लिए मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक की सिफारिश की गई थी।

नया नियम क्या कहता है?

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन ने सभी पर्यटन जोनों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है।

  • सफारी पर जाने वाले सभी पर्यटक, जीप ड्राइवर, गाइड और रिजर्व के साथ जाने वाला स्टाफ, किसी भी स्थिति में मोबाइल फोन साथ नहीं ले जा सकेंगे।

  • प्रवेश से पहले गेट पर ही मोबाइल जमा कराने की व्यवस्था की जाएगी; बाहर निकलने पर ही फोन वापस मिलेंगे।

  • यह नियम रिजर्व के कोर टूरिज़्म ज़ोन सहित सभी सफारी रूट्स पर लागू रहेगा, ताकि जंगली जानवरों के हैबिटेट में मानवीय दखल न्यूनतम रहे।

रिजर्व प्रबंधन का स्पष्ट कहना है कि सफारी का मकसद ‘वाइल्डलाइफ व्यूइंग’ है, न कि सोशल मीडिया कंटेंट बनाना, इसलिए मोबाइल बैन जरूरी कदम है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

2025 में ‘इन रे: कॉर्बेट’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बाघ रिजर्वों के लिए कई सख्त दिशानिर्देश जारी किए थे।

  • कोर्ट ने निर्देश दिया कि टाइगर रिजर्व के कोर हैबिटेट के टूरिज्म ज़ोन्स में मोबाइल फोन का इस्तेमाल अनुमति नहीं होगा, ताकि शोर, फ्लैश, अनावश्यक मूवमेंट और ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग जैसी गतिविधियां रुक सकें।

  • कोर्ट ने सभी टाइगर रिजर्व और उनके इको-सेंसिटिव ज़ोन को ‘साइलेंस ज़ोन’ घोषित करने की सिफारिश की, जहां नॉइज़ पॉल्यूशन और मानवीय एक्टिविटी सख्ती से नियंत्रित हो।

  • इन निर्देशों को लागू करने की जिम्मेदारी सभी राज्यों और नेशनल टाइगर कंज़र्वेशन अथॉरिटी (NTCA) पर डाली गई, जिन्हें 6 महीने के अंदर नियम और सर्कुलर जारी करने को कहा गया।

कॉर्बेट प्रशासन का यह निर्णय इन्हीं निर्देशों के पालन का हिस्सा है।

वन्यजीवों को मोबाइल से क्या नुकसान?

वन्यजीव विशेषज्ञों और सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने मोबाइल फोन के कई नकारात्मक प्रभाव गिनाए थे।

  • सेल्फी, वीडियो और फोटो के चक्कर में पर्यटक वाहन से बाहर झुकते हैं, जानवरों के बहुत नजदीक जाने की कोशिश करते हैं, जिससे मानव–वन्यजीव टकराव का खतरा बढ़ जाता है।

  • लगातार रिंगटोन, म्यूजिक, लाउड कॉलिंग और फ्लैश फोटोग्राफी से जानवरों के नेचुरल बिहेवियर और मूवमेंट पर असर पड़ता है; खासकर टाइगर, हाथी, हिरन, पक्षी जैसी प्रजातियां शोर से चौंक जाती हैं।

  • कई बार लाइव लोकेशन और वीडियो शेयरिंग से भीड़ किसी एक जानवर के आसपास जमा हो जाती है, जो रिजर्व की कैरिंग कैपेसिटी और साइलेंस ज़ोन के सिद्धांत के खिलाफ है।

मोबाइल बैन से इन समस्याओं में कमी और वन्यजीवों के लिए शांत, स्वाभाविक माहौल बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

नियम तोड़ने पर क्या कार्रवाई होगी?

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन ने साफ किया है कि नए नियम का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

  • सफारी के दौरान मोबाइल पकड़े जाने पर गाइड और ड्राइवर पर पेनल्टी, गेट पास निलंबन और आगे के ट्रिप्स पर रोक तक लग सकती है।

  • पर्यटकों से भी जुर्माना वसूलने और जरूरत पड़ने पर वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत केस दर्ज करने का विकल्प खुला रहेगा, खासकर अगर किसी की हरकत से जानवरों की सुरक्षा खतरे में पड़ी हो।

वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फैसला आने वाले समय में देश के अन्य बाघ रिजर्वों—जैसे रणथंभौर, कान्हा, बांधवगढ़, पेंच आदि—में भी लागू हो सकता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश सभी टाइगर रिजर्व्स पर समान रूप से लागू करने को कहा गया है।

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