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Wednesday, January 7, 2026
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“एक ऑडियो से इतना बड़ा बवंडर…” अंकिता भंडारी केस पर बोले CM धामी

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को एक बार फिर “बहुत संवेदनशील” और “हृदय विदारक” बताते हुए मामले पर उठ रहे नए विवादों पर प्रतिक्रिया दी। हाल के दिनों में एक कथित ऑडियो क्लिप के आधार पर केस की जांच और साक्ष्यों से छेड़छाड़ के आरोप लगाए जा रहे हैं, जिस पर सीएम धामी ने कहा कि मात्र एक ऑडियो के आधार पर इतना बड़ा बवंडर खड़ा कर देना उचित नहीं है और जांच को भटकाने वाला है।

सीएम धामी का बयान: संवेदनशील मामला, सियासत नहीं

मुख्यमंत्री ने अपने बयान में दोहराया कि अंकिता भंडारी की हत्या की जानकारी मिलते ही सरकार ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा कि जैसे ही घटना का पता चला, पुलिस को आरोपियों की गिरफ्तारी, रिसॉर्ट सीज़ करने और जांच को तेज करने के आदेश दिए गए थे। धामी ने इसे “बहुत हृदय विदारक घटना” बताते हुए कहा कि सरकार शुरू से ही पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और इस मामले को राजनीति की बजाय न्याय के नज़रिए से देखा जाना चाहिए।

सीएम ने साफ किया कि सरकार की कोशिश रही है कि कोई भी दोषी छूट न पाए और जांच एजेंसियों को फ्री-हैंड दिया गया है। उनके अनुसार, अदालत में ठोस चार्जशीट और सबूत पेश करना सरकार की प्राथमिकता रही है ताकि सज़ा सुनिश्चित हो सके।

‘एक ऑडियो क्लिप’ पर सवाल

हाल की बहस का केंद्र वह कथित ऑडियो है, जिसमें जांच से जुड़े कुछ दावों को लेकर संदेह जताया जा रहा है। धामी ने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में अदालत तथ्य, दस्तावेजी साक्ष्य और वैज्ञानिक जांच पर निर्णय लेती है, न कि सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो या अपुष्ट क्लिप्स पर। उन्होंने संकेत दिया कि बिना सत्यापन के ऐसे ऑडियो को आधार बनाकर सरकार और जांच एजेंसियों पर अविश्वास पैदा करना न्याय प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है।

सीएम का कहना है कि अगर किसी के पास कोई ठोस सबूत या तथ्य हैं, तो उन्हें अदालत या जांच एजेंसी के पास प्रस्तुत किया जाना चाहिए, न कि केवल सार्वजनिक मंचों पर आरोप–प्रत्यारोप तक सीमित रहना चाहिए।

विपक्ष और सवालों की राजनीति

अंकिता हत्याकांड शुरू से ही उत्तराखंड की राजनीति के केंद्र में रहा है। विपक्षी दलों ने कई बार आरोप लगाया है कि आरोपी प्रभावशाली परिवार से जुड़े हैं और शुरुआती दौर में जांच को कमजोर करने की कोशिश हुई। अब ऑडियो क्लिप के बहाने फिर से यह मुद्दा गरमाया है और सरकार पर जांच को प्रभावित करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

धामी सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए लगातार यह दावा कर रही है कि केस में किसी भी स्तर पर राजनीतिक दबाव नहीं डाला गया और कानून के मुताबिक कार्रवाई हो रही है। सरकार का तर्क है कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में सार्वजनिक बयानबाज़ी पीड़ित परिवार की भावनाओं और न्यायिक प्रक्रिया—दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

न्याय प्रक्रिया और लोगों की उम्मीदें

अंकिता भंडारी हत्याकांड ने पूरे उत्तराखंड और देशभर में आक्रोश पैदा किया था, जिसके बाद सख्त कानून, रिसॉर्ट संस्कृति पर लगाम और महिला सुरक्षा पर गंभीर चर्चा तेज हुई। लोग चाहते हैं कि इस केस में दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले और कोई भी तकनीकी या कानूनी कमी न्याय में बाधा न बने।

सीएम धामी के ताज़ा बयान से साफ है कि सरकार अभी भी खुद को “प्रो–जस्टिस” पोज़िशन पर दिखाना चाहती है, लेकिन ऑडियो क्लिप जैसे नए विवाद यह भी दिखा रहे हैं कि समाज में इस मामले को लेकर अब भी शंकाएं और सवाल बने हुए हैं।

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