Narendra Modi ने नोबेल पुरस्कार विजेता Rabindranath Tagore की जयंती ‘पोचिशे बोइशाख’ के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस खास मौके पर पीएम मोदी ने टैगोर को भारत की सभ्यतागत आत्मा की आवाज बताते हुए कहा कि उनका योगदान भारतीय समाज, साहित्य और संस्कृति के लिए अमूल्य है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि गुरुदेव टैगोर केवल एक महान कवि ही नहीं थे, बल्कि वे एक असाधारण दार्शनिक, शिक्षाविद और कलाकार भी थे। उन्होंने मानवता की गहरी भावनाओं और भारतीय संस्कृति के सर्वोच्च आदर्शों को अपनी रचनाओं के माध्यम से अभिव्यक्ति दी।
टैगोर की विरासत आज भी प्रासंगिक
पीएम मोदी ने कहा कि टैगोर ने अपने नवीन विचारों, रचनात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक आत्मविश्वास से देश को समृद्ध किया। उनकी साहित्यिक रचनाएं और विचार आज भी समाज को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि गुरुदेव के विचार आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे और देश के विकास व सामाजिक उत्थान के प्रयासों में मार्गदर्शन करते रहेंगे।
केंद्रीय मंत्रियों ने भी दी श्रद्धांजलि
केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju ने भी रवींद्र जयंती पर गुरुदेव को नमन किया। उन्होंने कहा कि टैगोर की विरासत मानवता, रचनात्मकता और भारतीय सभ्यता की समृद्ध परंपराओं का प्रतीक है।
रिजिजू ने कहा कि गुरुदेव का जीवन और उनकी शिक्षाएं आज भी समाज को नई सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण देती हैं।
क्यों खास है रवींद्र जयंती?
रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती बंगाली कैलेंडर के अनुसार ‘पोचिशे बोइशाख’ को मनाई जाती है, जिसे Rabindra Jayanti कहा जाता है। इस दिन देशभर में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और उनकी रचनाओं का पाठ किया जाता है।
गुरुदेव की रचनाएं, जिनमें Jana Gana Mana और Amar Sonar Bangla शामिल हैं, उनकी अमर विरासत का हिस्सा हैं। भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में उनका साहित्य और दर्शन आज भी लोगों को प्रेरित कर रहा है।

