LPG Shortage: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। लाल सागर और ओमान की खाड़ी के आसपास बढ़ते तनाव का सीधा असर अब भारतीय रसोई तक पहुँचने वाली LPG सिलेंडरों की किल्लत के रूप में दिखने लगा है। भारत अपनी गैस जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा समुद्री मार्ग से आयात करता है, लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों ने सप्लाई चैन की कड़ियाँ तोड़ दी हैं। ऐसे में भारत ने अपनी रणनीति बदलते हुए सात समंदर पार एक नया भरोसेमंद साथी खोज निकाला है।
होर्मुज मार्ग का संकट
भारत के लिए Strait of Hormuz किसी जीवन रेखा से कम नहीं है। आंकड़े बताते हैं कि देश का लगभग 60 प्रतिशत कच्चा तेल और LPG इसी संकरे रास्ते से होकर आता है। लेकिन ईरान और पड़ोसी देशों के बीच जारी संघर्ष ने इस मार्ग को असुरक्षित बना दिया है। जहाजों को निशाना बनाए जाने के डर और बढ़ते बीमा खर्च की वजह से गैस की खेप समय पर भारत नहीं पहुँच पा रही है। इस अनिश्चितता ने घरेलू बाजार में हाहाकार मचाने जैसी स्थिति पैदा कर दी थी।
20 हजार किमी दूर से मिली ‘संजीवनी’
जब खाड़ी देशों से सप्लाई बाधित हुई, तब भारत ने दक्षिण अमेरिकी देश अर्जेंटीना की ओर रुख किया। करीब 20,000 किलोमीटर की भौगोलिक दूरी होने के बावजूद, अर्जेंटीना ने भारत की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है। वर्ष 2026 की पहली तिमाही के दौरान अर्जेंटीना ने रिकॉर्ड मात्रा में LPG का निर्यात भारत को किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि एक कूटनीतिक जीत भी है। इतनी लंबी दूरी से गैस मंगाना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सप्लाई की निरंतरता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था।
आत्मनिर्भरता की नई दिशा
इस संकट ने भारत को एक कड़ा सबक भी सिखाया है। सरकार अब यह समझ चुकी है कि ऊर्जा के लिए केवल एक क्षेत्र (पश्चिम एशिया) पर निर्भर रहना भविष्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। यही कारण है कि अब भारत अपनी ‘एनर्जी बास्केट’ में विविधता ला रहा है। अर्जेंटीना जैसे देशों के साथ बढ़ता सहयोग इसी रणनीति का हिस्सा है। इससे न केवल वर्तमान की कमी दूर हो रही है, बल्कि भविष्य के किसी भी बड़े वैश्विक संकट से निपटने के लिए एक वैकल्पिक आधार तैयार हो रहा है।

