आगरा में अवैध रूप से रह रहे 38 बांग्लादेशी नागरिकों पर अब प्रशासन की गाज़ गिर चुकी है। इन सभी को देश से बाहर भेजने (डिपोर्ट करने) की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और पुलिस ने इन्हें कड़ी सुरक्षा में अपनी कस्टडी में लेने की तैयारी कर ली है।
कहां और कैसे पकड़े गए?
ये 38 बांग्लादेशी सिकंदरा थाना क्षेत्र की आवास विकास कॉलोनी, सेक्टर–13 के पास बनी एक अवैध बस्ती में रह रहे थे। जानकारी मिलने के बाद पुलिस और इंटेलिजेंस की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर इन्हें चिन्हित किया।
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टीम को मौके से कई संदिग्ध दस्तावेज मिले, जिनमें आधार जैसे भारतीय पहचान पत्र होने के दावे भी सामने आए हैं, जिनकी अब जांच की जा रही है।
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पूछताछ में कई लोगों ने अपना मूल पता बांग्लादेश के अलग-अलग जिलों का बताया और वैध पासपोर्ट–वीजा या ट्रैवल डॉक्यूमेंट दिखाने में नाकाम रहे।
अब आगे क्या प्रक्रिया होगी?
आगरा पुलिस ने इन सभी को 10 जनवरी को अपनी कस्टडी में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी की है।
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सबसे पहले इनकी पहचान और नागरिकता की आधिकारिक पुष्टि की जाएगी, जिसके लिए केंद्रीय एजेंसियों और BSF के इनपुट लिए जाएंगे।
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इसके बाद विदेशी नागरिकों से जुड़े प्रावधानों और Foreigners Act के तहत केस की स्थिति स्पष्ट कर FRRO (Foreigners Regional Registration Office) के माध्यम से इन्हें बांग्लादेश भेजने की प्रक्रिया चलाई जाएगी।
लगातार सख्ती का हिस्सा
बीते कुछ वर्षों में देशभर में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है—कई राज्यों में ऐसे सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार कर या तो जेल भेजा गया है या फिर “पुशबैक/डिपोर्ट” किया गया है। आगरा में 38 लोगों पर हुई ताज़ा कार्रवाई को भी इसी बड़े अभियान की कड़ी माना जा रहा है।

