लखनऊ को साइबर क्राइम के लिहाज से उत्तर प्रदेश का सबसे असुरक्षित शहर माना जा रहा है। NCRB ‘क्राइम इन इंडिया 2023’ रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ ने 19 मेट्रो शहरों में चौथा स्थान हासिल किया, जहां 1,453 साइबर क्राइम केस दर्ज हुए। केवल बेंगलुरु (17,631), हैदराबाद (4,855) और मुंबई (4,131) से आगे हैं। राज्य स्तर पर UP ने 10,794 केस दर्ज कर तीसरा स्थान लिया।
NCRB डेटा: लखनऊ का साइबर क्राइम में दबदबा
NCRB रिपोर्ट में फ्रॉड 69% केसों का कारण बना। UP में महिलाओं के खिलाफ साइबर क्राइम में तीसरा स्थान (1,463 केस)। लखनऊ में साइबर स्टॉकिंग, एक्सटॉर्शन, फिशिंग प्रमुख। 2022-2024 में UP में कुल 34,742 केस, जिसमें लखनऊ का बड़ा हिस्सा।
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2023 में UP केस: 10,794 (2022 से 6.7% बढ़ोतरी)।
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कन्विक्शन रेट सबसे ऊंचा, जो पुलिस की कार्रवाई दर्शाता।
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ईस्ट जोन (लखनऊ) में सबसे ज्यादा फ्रॉड।
कारण: डिजिटल हब और युवाओं का शोषण
लखनऊ राज्य की राजधानी होने से डिजिटल ट्रांजेक्शन अधिक। ‘म्यूल अकाउंट’ स्कैम में युवा बैंक खाते किराए पर देते। गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) भी हॉटस्पॉट। 2017-2025 तक UP में 87,850 केस, ₹382 करोड़ रिकवर।
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फेक बेटिंग, UPI फ्रॉड आम।
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साइबर सेल: 57 जिलों में, हेल्पडेस्क सभी थानों पर।
पुलिस की कार्रवाई और चुनौतियां
UP पुलिस ने 60 साइबर ट्रेंड पुलिसकर्मी तैनात किए। I4C CyTrain से ट्रेनिंग, NCRP पोर्टल एक्टिव। DGP राजीव कृष्णा ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का ऐलान। चुनौतियां: रिपोर्टिंग कम, अंतरराष्ट्रीय स्कैम।
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1930 हेल्पलाइन, 112 का साइबर डेस्क।
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कन्विक्शन रेट हाई, लेकिन केस बढ़ रहे।

