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सोमवार, सितम्बर 14, 2026
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Hindi Diwas 2026: 14 सितम्बर को ही क्यों मनाया जाता है हिंदी दिवस ? जानें इस तारीख से जुड़ी कुछ और खास बातें

Hindi Diwas 2026: हिंदी दुनिया में सबसे ज्यादा बोली और समझी जाने वाली भाषाओं में शामिल है। भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में भी हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया।

संविधान सभा ने हिंदी के साथ अंग्रेजी को भी आधिकारिक कामकाज के लिए स्वीकार किया था। हालांकि हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिलने के चार साल बाद, 14 सितंबर 1953 को पहली बार हिंदी दिवस मनाया गया।

14 सितंबर के इतिहास में दर्ज प्रमुख घटनाएं

1770: डेनमार्क में प्रेस की स्वतंत्रता को मान्यता मिली।

1833: विलियम बेंटिक भारत के पहले गवर्नर जनरल के रूप में भारत पहुंचे।

1917: रूस को आधिकारिक तौर पर गणतंत्र घोषित किया गया।

1949: संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा का दर्जा दिया।

1959: सोवियत संघ का अंतरिक्ष यान पहली बार चंद्रमा की सतह पर उतरा।

1960: खनिज तेल उत्पादक देशों ने मिलकर OPEC की स्थापना की।

1998: माइक्रोसॉफ्ट ने जनरल इलेक्ट्रिक को पीछे छोड़ते हुए बाजार मूल्य के लिहाज से दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी का स्थान हासिल किया।

2000: तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अमेरिकी सीनेट की संयुक्त बैठक को संबोधित किया।

2001: अमेरिका में ओसामा बिन लादेन के खिलाफ अभियान के लिए 40 अरब डॉलर की राशि मंजूर की गई।

2007: जापान ने तानेगाशिमा अंतरिक्ष केंद्र से अपना पहला चंद्र उपग्रह प्रक्षेपित किया।

2008: रूस के पेर्म हवाई अड्डे पर एअरोफ्लोत का विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें सवार सभी 88 लोगों की मौत हो गई।

2009: लिएंडर पेस और लुकास लोही की जोड़ी ने यूएस ओपन पुरुष युगल का खिताब जीता।

2016: रियो पैरालंपिक में भारत के पदकों की संख्या चार पहुंच गई।

2024: कांग्रेस ने सेबी पर चीनी कंपनियों में निवेश को लेकर आरोप लगाए।

हिंदी दिवस सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं

हिंदी दिवस का उद्देश्य हिंदी भाषा के महत्व को रेखांकित करने के साथ-साथ इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देना भी है। इस अवसर पर देशभर में स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी संस्थानों में भाषण, निबंध, कविता और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

14 सितंबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह तारीख भारतीय भाषा नीति और देश के संवैधानिक इतिहास में एक अहम पड़ाव को याद करने का अवसर देती है।

 

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