Chamoli Tunnel Accident: उत्तराखंड के चमोली जिले में टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (THDC) की विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में अचानक पानी और मलबा घुस गया। हादसा शाम करीब साढ़े छह से सात बजे के बीच हुआ।
मलबे और पानी के अचानक सैलाब से सुरंग में काम कर रहे कई मजदूर अंदर फंस गए। राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया, लेकिन हादसे में सात मजदूरों की जान चली गई।
मजदूरों की संख्या को लेकर उठे सवाल
हादसे के बाद सबसे गंभीर सवाल निर्माण कंपनी हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (HCC) की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे। बताया गया कि कंपनी लंबे समय तक यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि हादसे के वक्त सुरंग के अंदर कितने मजदूर मौजूद थे।
कभी अंदर फंसे मजदूरों की संख्या 24 बताई गई तो कभी 28। देर रात अधिकारियों के दबाव के बाद स्थिति स्पष्ट हुई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक करीब 28 मजदूर फंसे थे, जिनमें से 18 को बाहर निकाला गया, सात की मौत हुई और तीन मजदूर लापता बताए गए।
यह स्थिति इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि किसी भी निर्माण स्थल पर काम कर रहे कर्मचारियों का सटीक रिकॉर्ड सुरक्षा और आपातकालीन बचाव व्यवस्था का अहम हिस्सा होता है।
हर परिवार को घंटों रहा अपनों का इंतजार
हादसे के बाद मजदूरों के परिवारों के लिए हर मिनट बेहद मुश्किल रहा। किसी को अपने बेटे की चिंता थी तो कोई पति या भाई की खबर का इंतजार कर रहा था। ऐसे में कंपनी की ओर से मजदूरों की संख्या को लेकर स्पष्ट जानकारी न मिलना चिंता को और बढ़ाने वाला रहा।
हादसे ने निर्माण परियोजनाओं में श्रमिकों की सुरक्षा, निगरानी और आपातकालीन प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सिल्क्यारा हादसे की याद हुई ताजा
चमोली की घटना ने उत्तरकाशी के सिल्क्यारा-बड़कोट सुरंग हादसे की याद भी ताजा कर दी। 12 नवंबर 2023 को निर्माणाधीन सुरंग का एक हिस्सा ढहने के बाद 41 मजदूर अंदर फंस गए थे। उन्हें करीब 17 दिनों तक चले चुनौतीपूर्ण बचाव अभियान के बाद बाहर निकाला गया था।
चमोली हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि पहाड़ी क्षेत्रों में सुरंग निर्माण के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा के लिए तय व्यवस्थाओं की निगरानी कितनी प्रभावी है।

