Amarnath Yatra 2026: अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए MRT (Mountain Rescue Team) यानी माउंटेन रेस्क्यू टीम एक अभेद्य ‘सुरक्षा कवच’ की तरह काम करती है। यह विशेष टीम दुर्गम रास्तों, ऊंचे पहाड़ों और अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के बीच तीर्थयात्रियों के लिए किसी ‘देवदूत’ से कम नहीं होती।
यहाँ MRT और उनकी भूमिका के बारे में पूरी डिटेल दी गई है
क्या है MRT (Mountain Rescue Team)
MRT जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों (जैसे NDRF, SDRF) के उन जांबाज जवानों की एक विशेष इकाई है, जिन्हें पहाड़ी युद्ध और बचाव कार्यों (Mountaineering & Rescue) में महारत हासिल होती है। इनका मुख्य कार्य कठिन रास्तों पर फंसे यात्रियों को सुरक्षित निकालना और आपदा के समय तुरंत सहायता पहुँचाना है।
क्यों कहा जाता है इन्हें ‘देवदूत’?
अमरनाथ यात्रा के रास्तों पर ‘पिसू टॉप’, ‘महागुनास पास’ और ‘संगम’ जैसे कई खतरनाक मोड़ आते हैं। यहाँ ऑक्सीजन की कमी और थकान के कारण जब यात्री आगे नहीं बढ़ पाते, तब MRT के जवान उन्हें सहारा देकर सुरक्षित कैंप तक पहुँचाते हैं।बादल फटने (Cloudburst), भूस्खलन (Landslides) या बर्फीले तूफ़ान के समय यह टीमें सबसे पहले ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ के रूप में काम करती हैं।यदि किसी यात्री को सांस लेने में तकलीफ होती है या पहाड़ पर चोट लगती है, तो MRT उन्हें स्ट्रेचर या पीठ पर लादकर निकटतम चिकित्सा केंद्र तक ले जाती है।
विशेष ट्रेनिंग
अमरनाथ यात्रा 2026 (जो 3 जुलाई से शुरू हो रही है) के लिए MRT के जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया है । हाल ही में जम्मू के संबा जिले में NDRF और जम्मू-कश्मीर पुलिस की MRT ने 15 दिनों का कड़ा पर्वतारोहण प्रशिक्षण पूरा किया है इन्हें रस्सियों के सहारे नदी पार कराने, ऊँची चट्टानों से लोगों को उतारने और प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) देने की एडवांस ट्रेनिंग दी जाती है।
यात्रा 2026 की सुरक्षा व्यवस्था
इस साल की यात्रा के लिए सुरक्षा को और अधिक पुख्ता किया गया है।हर यात्री की लोकेशन को ट्रैक करने के लिए RFID कार्ड अनिवार्य हैं।संवेदनशील रास्तों पर Facial Recognition System (FRS) और 360-डिग्री कैमरों का जाल बिछाया गया है।गंभीर परिस्थितियों के लिए MRT के साथ वायुसेना के हेलीकॉप्टर भी स्टैंडबाय पर रहते हैं।

