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सोमवार, जून 29, 2026
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Lohagad Fort: क्या है इतिहास चर्चित लोहगढ़ किले का? मराठा साम्राज्य का खजाना क्यों रहता था यहाँ सुरक्षित

Lohagad Fort History: महाराष्ट्र की सह्याद्रि पर्वतमालाओं में स्थित लोहगढ़ किला केवल एक ऐतिहासिक दुर्ग नहीं, बल्कि मराठा साम्राज्य के साहस, रणनीति और वैभव का प्रतीक माना जाता है। ‘लोहे का किला’ के नाम से प्रसिद्ध यह दुर्ग अपनी अभेद्य संरचना और ऐतिहासिक महत्व के कारण सदियों से आकर्षण का केंद्र रहा है। हाल के दिनों में यह किला एक चर्चित आपराधिक मामले के चलते सुर्खियों में है, लेकिन इसका गौरवशाली इतिहास आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

शिवाजी महाराज की रणनीति का अहम केंद्र

लोहगढ़ का मराठा इतिहास में विशेष स्थान है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने वर्ष 1648 में पहली बार इस किले पर अधिकार किया था। हालांकि 1665 में मुगलों के साथ हुई पुरंदर संधि के तहत उन्हें यह किला छोड़ना पड़ा, लेकिन 1670 में उन्होंने इसे दोबारा जीत लिया।

किले पर पुनः कब्जा करने के बाद शिवाजी महाराज ने इसे अपने साम्राज्य की तिजोरी के रूप में इस्तेमाल किया। इतिहासकारों के अनुसार, सूरत अभियान से प्राप्त विशाल धन-संपदा और अन्य मूल्यवान खजाने को इसी किले में सुरक्षित रखा जाता था। इसकी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और दुर्गम भौगोलिक स्थिति इसे खजाना रखने के लिए सबसे सुरक्षित स्थान बनाती थी।

क्यों कहा जाता है ‘लोहे का किला’?

समुद्र तल से करीब 1,033 मीटर की ऊंचाई पर स्थित लोहगढ़ अपनी मजबूत किलेबंदी और रणनीतिक स्थिति के कारण लगभग अजेय माना जाता था। इसी अभेद्य सुरक्षा और मजबूती के कारण इसे ‘लोहे का किला’ कहा जाने लगा। इसकी विशाल दीवारें और कठिन चढ़ाई दुश्मनों के लिए बड़ी चुनौती थीं।

2,000 साल पुराना इतिहास

लोहगढ़ का इतिहास मराठा काल से भी कहीं अधिक पुराना माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, इस किले का अस्तित्व लगभग 2,000 वर्ष पुराना है। सातवाहन, चालुक्य, राष्ट्रकूट, यादव, बहमनी, निजाम और मुगल जैसे कई राजवंशों ने अलग-अलग समय में इस पर शासन किया।

वर्ष 2019 में यहां की एक गुफा में पहली-दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व का जैन ब्राह्मी शिलालेख भी मिला था, जिससे इसकी प्राचीन ऐतिहासिक महत्ता और स्पष्ट हुई। बाद में मराठा राजनेता नाना फडणवीस ने यहां जल संरचनाओं और सीढ़ीदार कुओं का भी निर्माण कराया।

पर्यटन प्रेमियों की पहली पसंद

आज लोहगढ़ किला इतिहास और प्रकृति दोनों का अद्भुत संगम माना जाता है। विशेष रूप से मानसून के दौरान यहां की हरियाली, बादलों से घिरी पहाड़ियां और झरने पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

किले का प्रसिद्ध ‘विंचू काटा’ (बिच्छू की पूंछ) हिस्सा, गणेश दरवाजा, नारायण दरवाजा, हनुमान दरवाजा और महा दरवाजा आज भी इसकी ऐतिहासिक भव्यता की झलक दिखाते हैं। इसके अलावा पास स्थित भाजा गुफाएं और विसापुर किला भी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं।

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