राहुल गांधी के PM बनने पर उठाया सवाल
रामदास आठवले ने कहा कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनना था तो उन्हें मनमोहन सिंह के कार्यकाल में ही यह जिम्मेदारी संभालनी चाहिए थी। उस समय कांग्रेस केंद्र की सत्ता में थी। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा राजनीतिक हालात में कांग्रेस के लिए बहुमत हासिल करना आसान नहीं है।
रैलियों से नहीं बदलेगी सरकार, 2029 पर करें फोकस
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी को रैली निकालने और विरोध प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है, लेकिन लोकतंत्र में सिर्फ प्रदर्शनों से सरकार नहीं बदलती। कांग्रेस को सत्ता में वापसी करनी है तो उसे 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी करनी चाहिए।
चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोपों को लेकर भी आठवले ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में सुधार के दौरान कुछ नाम हटाए गए हैं, लेकिन इसे लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2014 में बीजेपी की सरकार बनने के समय मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति कांग्रेस शासनकाल में हुई थी।
दिवाली से पहले रैली पर क्यों जताई नाराजगी?
आठवले ने दिवाली से पहले निकाली गई रैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि त्योहार के समय बाजारों में व्यापारियों का कारोबार अच्छा चलता है। ऐसे में रैली से बाजार और व्यापार प्रभावित हो सकते हैं। उनके मुताबिक, व्यापारियों ने भी इस परेशानी को लेकर अपील की थी, लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया।
ममता बनर्जी के वोट चोरी आरोप पर पलटवार
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वोट चोरी संबंधी आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए आठवले ने 2021 के विधानसभा चुनाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी को जीत मिली थी और उस समय किसी ने इस तरह के आरोप नहीं लगाए थे।
1984 के सिख विरोधी दंगों का किया जिक्र
आठवले ने 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख विरोधी दंगों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस दौरान सिख समुदाय के कई लोगों की हत्या हुई और उनके घरों को जलाया गया था। उन्होंने इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि सिख समुदाय उन घटनाओं को आज भी नहीं भूल सकता।

