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Wednesday, May 6, 2026
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Vande Mataram: अब वंदे मातरम् को मिलेगा राष्ट्रगान जैसा दर्जा, कैबिनेट ने दी अहम संशोधन को मंजूरी

Vande Mataram: पश्चिम बंगाल चुनाव में जीत के बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की पहली बैठक में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। कैबिनेट ने वंदे मातरम् को राष्ट्रगान जन गण मन के समान कानूनी दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके लिए Prevention of Insults to National Honour Act में संशोधन किया जाएगा।

इस फैसले के बाद अब वंदे मातरम् के अपमान, उसके गायन में बाधा डालने या कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न करने पर वही सख्त कार्रवाई होगी, जो अभी राष्ट्रगान के अपमान पर लागू होती है। सरकार जल्द ही इस संशोधन विधेयक को संसद में पेश कर सकती है।

बंकिम चंद्र चटर्जी की रचना को मिलेगा कानूनी संरक्षण

वंदे मातरम् की रचना Bankim Chandra Chattopadhyay ने की थी। यह गीत भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में एक प्रेरणास्रोत रहा है और लंबे समय से इसे राष्ट्रीय सम्मान का प्रतीक माना जाता है। अब सरकार इसे कानूनी सुरक्षा देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को और मजबूत करेगा और वंदे मातरम् की ऐतिहासिक भूमिका को औपचारिक रूप से और अधिक मान्यता देगा।

क्या होगा कानून में बदलाव?

मौजूदा कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान पर जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। संशोधन के बाद वंदे मातरम् भी इसी श्रेणी में शामिल हो जाएगा।

इसका मतलब है कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर वंदे मातरम् के गायन में बाधा डालता है या उसका अपमान करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक सजा तीन साल तक की हो सकती है।

150 साल पूरे होने पर बड़ा फैसला

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। केंद्र सरकार पहले भी इसके सम्मान को लेकर कई दिशा-निर्देश जारी कर चुकी है। अब इसे कानूनी सुरक्षा देने की पहल को सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह फैसला केवल एक कानूनी बदलाव नहीं बल्कि राष्ट्रीय अस्मिता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का संदेश भी है। खासकर बंगाल की राजनीति में वंदे मातरम् की ऐतिहासिक और भावनात्मक भूमिका को देखते हुए इस निर्णय को प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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