Entertainment News: टीवी की लोकप्रिय अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी का नाम साल 2018 में एक हाई-प्रोफाइल मर्डर केस से जुड़ने के बाद काफी चर्चा में आ गया था। मुंबई के हीरा कारोबारी राजेश्वर उदानी की रहस्यमयी मौत की जांच के दौरान पुलिस को उनके कॉल रिकॉर्ड में देवोलीना का नंबर मिला था। इसके बाद अभिनेत्री से पूछताछ हुई और मामला सुर्खियों में आ गया। हालांकि, बाद की जांच में उन्हें किसी भी साजिश में शामिल नहीं पाया गया।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
राजेश्वर उदानी (57) 28 नवंबर 2018 को अपने ऑफिस से अचानक लापता हो गए थे। परिवार की शिकायत पर पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। कई दिनों की तलाश के बाद 7 दिसंबर को पनवेल इलाके से उनका शव बरामद हुआ। शव की हालत खराब होने के कारण यह मामला और भी रहस्यमयी बन गया।
जांच के दौरान पुलिस ने उदानी के मोबाइल की कॉल डिटेल्स खंगाली, जिसमें देवोलीना भट्टाचार्जी का नंबर भी मिला। इसी वजह से पुलिस ने उनसे पूछताछ की।
पूछताछ में देवोलीना ने क्या बताया?
पुलिस पूछताछ में देवोलीना ने बताया कि 16 नवंबर 2018 को राजेश्वर उदानी और सचिन पवार उनके घर आए थे। वहां दोनों ने साथ बैठकर शराब पी थी। बातचीत के दौरान कथित तौर पर राजेश्वर ने अभिनेत्री को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिससे सचिन पवार नाराज हो गया।
बताया गया कि सचिन ने यह बात दिनेश पवार को बताई, जिसकी पहले से ही राजेश्वर उदानी के साथ आर्थिक विवाद और पुरानी दुश्मनी थी। जांच में सामने आया कि इसी दुश्मनी के चलते कथित तौर पर एक हनी ट्रैप जैसी साजिश रची गई।
आखिर देवोलीना को क्यों मिली राहत?
पूरे मामले की जांच के बाद पुलिस को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि देवोलीना भट्टाचार्जी इस कथित साजिश या हत्या में शामिल थीं। उनका नाम केवल कॉल रिकॉर्ड और परिचय की वजह से जांच में आया था। पर्याप्त सबूत न मिलने पर उन्हें मामले से बरी कर दिया गया।
सचिन और देवोलीना की मुलाकात कैसे हुई थी?
जानकारी के अनुसार, देवोलीना और सचिन पवार की मुलाकात एक राजनीतिक रैली के दौरान हुई थी। वहीं, राजेश्वर उदानी से अभिनेत्री की पहचान उनकी बेटी की मेहंदी समारोह में हुई थी। इसके बाद दोनों अच्छे दोस्त बन गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देवोलीना और सचिन भविष्य में साथ काम करने की योजना भी बना रहे थे।
आज भी चर्चा में रहता है यह मामला
राजेश्वर उदानी की मौत का मामला उस समय काफी चर्चित रहा था क्योंकि इसमें कई लोगों के नाम सामने आए थे और जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। हालांकि, देवोलीना भट्टाचार्जी के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला और उन्हें कानूनी तौर पर राहत मिल गई। यह मामला आज भी उन चर्चित मामलों में गिना जाता है, जहां शुरुआती शक और अंतिम जांच के नतीजे पूरी तरह अलग निकले।

