Sangli Crime Case: महाराष्ट्र के सांगली जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक पिता ने अपनी ही दो छोटी बेटियों के साथ ऐसी क्रूरता की, जिसे सुनकर हर कोई सन्न रह गया। 10 और 11 साल की मासूम बच्चियों को पिता ने बेरहमी से पीटा और फिर उन्हें घर की छत से उल्टा लटका दिया। दोनों बच्चियां पूरी रात इसी हालत में तड़पती रहीं।
शक बना मौत की वजह
जानकारी के मुताबिक, पिता को शक था कि उसकी बेटियों ने एक रिश्तेदार के घर से पैसे चुरा लिए हैं। इसी गुस्से में उसने यह खौफनाक कदम उठाया। उसने दोनों बच्चियों के हाथ-पैर बांध दिए और उन्हें दीवार पर लगे लोहे के सहारे उल्टा टांग दिया। यह सजा इतनी भयानक थी कि एक बच्ची की जान ही चली गई।
अस्पताल पहुंचते ही खुला मामला
घटना का खुलासा तब हुआ जब पिता अपनी बेटी को अस्पताल लेकर पहुंचा। उसने डॉक्टरों से कहा कि बच्ची बीमार है। लेकिन जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची की पहले ही मौत हो चुकी है। डॉक्टरों को पिता की बातों पर शक हुआ, जिसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने शुरू की जांच
सूचना मिलते ही पुलिस अस्पताल पहुंची और पिता से पूछताछ शुरू की। शुरुआत में वह बार-बार अपने बयान बदलता रहा, जिससे पुलिस का शक और गहरा गया। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की गई, जिसमें पूरी सच्चाई सामने आ गई।
रातभर झेलती रहीं दर्द
पुलिस के अनुसार, परिवार के अन्य लोगों ने बच्चियों को बचाने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने उन्हें भी धमका दिया। उसने हंसिया से हमला करने की धमकी दी, जिससे कोई आगे नहीं बढ़ पाया। दोनों बच्चियां पूरी रात पानी के लिए तड़पती रहीं, लेकिन पिता का दिल नहीं पसीजा। सुबह तक दोनों बेहोश हो गईं।
एक की मौत, दूसरी का इलाज जारी
सुबह बच्चियों को नीचे उतारकर तुरंत अस्पताल ले जाया गया। लेकिन 10 साल की ऋतुजा की हालत बेहद खराब हो चुकी थी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं, उसकी बहन अनुजा का अस्पताल में इलाज चल रहा है और उसकी हालत पर डॉक्टर नजर बनाए हुए हैं।
आरोपी पिता गिरफ्तार
पुलिस ने आरोपी पिता दादू उर्फ नाना यमगर को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी मानसिक रूप से अस्थिर भी हो सकता है, जिसकी जांच की जा रही है।
समाज के लिए बड़ा सवाल
यह घटना समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या सिर्फ शक के आधार पर इतनी बड़ी सजा दी जा सकती है? मासूम बच्चों के साथ इस तरह की क्रूरता कहीं न कहीं हमारी सोच पर भी सवाल उठाती है।

